क्रोध नहीं क्षमा सीखो* *आर्यिका विज्ञाश्री माताजी*

धर्म

*क्रोध नहीं क्षमा सीखो*
*आर्यिका विज्ञाश्री माताजी*

आलोद

प. पू. भारत गौरव विज्ञाश्री माताजी ससंघ का नैनवा के लिए बूंदी से भव्य मंगल विहार हुआ आर्यिका श्री का अलोद में गाजे बाजे के साथ माताजी ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश हुआ जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि आज जिनालय में माताजी के मुखारविंद से अभिषेक शांतिधारा हुई तत्पश्चात वहाँ धर्म सभा को संबोधित करते हुए माताजी ने कहा कि क्रोध हमारे जीवन को हमारे गुणों को नष्ट कर देता है ,एक बार क्रोध करने से 17 अरब श्वेत कोशिकाएं रक्त रूप में परिवर्तित हो जाती है ,क्रोध में व्यक्ति को कुछ समझ नहीं आता और वह बड़ी से बड़ी गलती कर बैठता है एक बार एक राजा था जो किसी भी बात पर गुस्सा हो जाता था और बिना सोचे-समझे कोई भी सजा सुना देता था ,एक बार उसे अपने महामंत्री पर गुस्सा आ गया और राजा ने उसे रात भर ठंडे पानी में खड़े रहने की सजा सुना दी।
अगले दिन जब महामंत्री राजा के सामने पहुंचा तो उसके चेहरे पर मुस्कान थी राजा यह देखकर हैरान रह गया उसने महामंत्री से पूछा कि तुम इतने शांत और खुश कैसे हो? क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा? महामंत्री बोला कि डर महाराज डर कैसा? मुझे किसी ने बताया था कि जो व्यक्ति बहुत गुस्सा करता है वह अगर ठन्डे पानी में रात भर खड़ा रहे तो उसका गुस्सा खत्म हो जाता है और साथ ही वह हमेशा जवान रहता है। यह सुनकर राजा ने खुद ठंडे पानी में खड़े रहने का निश्चय किया और महामंत्री को वापस भेज दिया। इसके बाद पानी में कुछ पल बिताते ही राजा को ठंड लगने लगी और उसे अहसास हुआ कि जिनको वह सजा देता है, उन पर क्या गुजरती होगी। तभी उसने प्रण किया और गुस्सा करना हमेशा के लिए छोड़ दिया। अतः मैं भी आपसे कहती हूँ जीवन मे आप क्षमा को धारण करे और क्रोध का त्याग करें । जिससे आपका शरीर भी स्वस्थ रहे और जीवन मस्त रहें । आर्यिका श्री का कल प्रातः माताजी का अलोद से विहार होगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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