जिंदगी कुछ कर गुजरने के लिए मिलीं है दुनिया में उन्हीं का नाम रहता है जो दुनिया को कुछ देते हैं –मुनि पुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज अभिषेक शांति धारा पशु पक्षियों के लिए भी हो
मुंगावली
–जिंदगी को मात्र गुजाराने की जरूरत नहीं है जिंदगी तो गुज़र रही है जिंदगी कुछ कर गुजरने के लिए मिलीं है दुनिया में उन्हीं का नाम रहता है जो दुनिया को कुछ देते हैं सूर्य को डुबाने की जरूरत नहीं वह तो आपने आप डूब जाता है इसी प्रकार जिंदगी को हमे जीना है व्याप्त करना है जिंदगी को सूर्य की तरह व्यापक कर दो कि आपकी जिंदगी हर किसी के काम आ जाए हम कितने दूर तक कि बात सुन पा रहे हैं मन को इतना व्यापक करो कि तुम्हारी बात को सुन सकें इतना अच्छा सोचो कि दुनिया हर कोने तक आपकी आवाज पहुंचे सोचो तुम चिंतन कर रहे हो और पड़ोसी सुखी हो जायें उक्त आश्य केउद्गार सुधा सागर सभागार में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए ।
मेरे घर के आगे किसी को कांटा ना चुभ जाये बस इतना सा विकल्प हो
उन्होंने कहा कि कौन बनता है जगन्नाथ कौन बनता जगत गुरु वह जो सारे जगत की चिंता करता है सारी दुनिया की भलाई चाहता है अपने रास्ते के ही कांटों को ना साफ करें जगत के लोगों को भी कहीं कांटों से बचना है आप लोग जब सड़क पर चलते हैं तो कांटों को देख कर चलते हैं जगत के किसी भी व्यक्ति को कांटा ना लग जाए ऐसे भाव बनाये पहले लोग अपने घरों के आगे बहुत दूर तक झाड़ू लगाते थे उसका एकमात्र उद्देश्य रहता था मेरे घर के दरवाजे से निकलने वाले का कहीं पैर गन्दा ना हो जाए मेरे घर के आगे किसी को कांटा ना चुभ जाये बस इतना सा विकल्प हो जाये इतना सी बात जगत का हितैषी बना देंगी।




जब पहाड़ों में भी श्री राम को दुखियों की आवाज सुनाई देती है।
महाराज श्री ने कहा भक्त किसी की बात सुने ना सुने भगवान को दुनिया की आवाज सुनाना पड़ता है सारी दुनिया श्री राम को क्यों चाहती है तुम्हारे कान अपने लोगों का दुख सुनकर दुखी होते हैं तुम संसार के कितने लोगों के दुःख को सुनकर दुखी होते हो श्री राम जंगल में सीता जी खोज में घूम रहे हैं उन्हें किसी के ( विलाप) रोने कि आवाज आती है वे लक्ष्मण से कहते हैं तुम्हें कृधन सुनाई दे रहा है लक्ष्मण कहते हैं हम इतनी जोर जोर से चिल्ला रहे हैं हमारी कोई नहीं सुन रहा और तुम्हारे लिए इन पहाड़ो से दुखी लोगों की आवाज सुनाई दे रही है तब रामचन्द्र जी कहते हैं कि तेरा भइया को लोग मर्याद पुरुषोत्तम मानते हैं मुझे सुनाना पड़ेगा क्या तुम्हारे कान इतने व्यस्त हैं कि जगत के दुःख को सुन सकें अपनो को लिए सब ही करते हैं जगत के लिए किया तब कोई बात है
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दूसरों को प्रभावित कर सकें ऐसे कुछ करके दिखाओ
उन्होंने कहा कि बनिया रात को खाना छोड़ देता है जैनी वह नहीं जो रात को खाना छोड़ दें हमारा सब कुछ उल्टा चलता है जैनी वह जो आपके साथ आये हुए लोगों को रात्रि में खाना छोड़ने की प्रेरणा दे सकें आपके यहां का फिल्मी हीरो रात्रि में भोजन नहीं करता और को भी प्रेरणा देते हैं उन्होंने कहा कि दूसरों से प्रभावित होना नहीं है दूसरों को प्रभावित करने की अपने अंदर सामर्थ लाना है तुम्हारा नियम तुम्हारे लिए ही नहीं पालना है इन्हें कितने को पलवा सकते हैं तुम्हारे नियम से कितने लोग लाभान्वित होंगे ऐसी साधना करना है आपका अच्छा व्यवहार कितने लोगों के जीवन में परिवर्तन ला रहा है कितने लोग अच्छे बन जाये तब कोई बात है ऐसा कुछ करना चाहिए तुम तो अपने घर में ही कुछ नहीं कर पा रहे जो तुम्हारा नियम है उसमें इतनी ताकत होना चाहिए कि कम से कम अपने आसपास के लोग अपने घरों के लोग तो प्रभावित हो रहे हैं जो तुम कर रहे हो उसे देख कर कितने लोगों का जीवन बदल रहा है ये देखना है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
