सत्य मौन होकर मुस्कुरा रहा है..और असत्य शब्द शोर मचा कर नाच रहा है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
जयपुर दिल्ली हाईवे
औरंगाबाद /जयपुर दिल्ली हायवे -भगवान महावीर ने जब सत्य के कैवल्य को पाया तो 66 दिन मौन होकर, मधुर मुस्कान से भर गये। शायद *उनका मौन कह रहा था कि जो मेरे मौन को नहीं समझ पा रहा है, वह शब्दों को क्या समझेगा-? क्योंकि अन्धे को दर्पण और गंजे को कंघी देना-दिखाना व्यर्थ है। जहाँ सत्य मुखर होता है, वहाँ शब्द की यात्रा आपोआप थम सी जाती है।
आप विचार करें – जो सत्य को ना सुनना चाहते, ना देखना चाहते, ना जानना चाहते, और ना जीना चाहते हैं, उनसे शब्द की यात्रा में, सह यात्री बनकर चलना निस्सार है। क्योंकि – मौन का प्रेम, मौन का आनंद, मौन की करूणा, मौन की मित्रता सत्य के करीब और बहुत होती है। जब शब्द अधिक शोर मचाते हैं तो वे अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते हैं। क्योंकि सत्य – मौन की अभिव्यक्ति है, मौन अनेक बीमारियों का इलाज है। शब्द औषधि है, तो मौन सर्वोषधि है। 

असत्य में – शब्दों की भीड़ है, शब्दो का बाजार है, लेकिन मौन अकेला है। सत्य जितना निडर होगा, मौन उतना प्रखर होगा।इसलिए हम व्रत उपवास की लम्बी यात्रा में मौन हो जाते हैं जिससे हमें अपने व्रत उपवास और लक्ष्य का बोध बना रहे। जब हम मौन होकर एकान्त साधना करते हैं तब अपने करीब और बहुत करीब होते हैं। क्योंकि मौन स्वयं से जोड़ता है, बाहर के प्रपंच और सम्बन्धों से बचाता है। शब्दों की यात्रा, धन कमाने, यश को बढ़ाने, स्वयं की पहचान बनाने और लोगों को ठगने के लिये होती है। शब्दों की यात्रा में अनेक कारण है, लेकिन सत्य और मौन अकारण है। *शोर में शिखर की ऊंचाई है, तो मौन में गहराई है, सतह है, बोध है, समझ है, विवेक बुद्धि है।




उक्त उदगार अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने
व्यक्त किए उन्होंने कहा हमने 557 दिन का अखण्ड मौन रखा, आप 24 घन्टे में 57 मिनट ही मौन का पालन करके अपने भीतर के शोर को सुनना, समझना और मुस्कुराना। यदि शब्द मौन से ज्यादा कीमती हो, तब दो शब्द बोलें, अन्यथा मौन रहना ही बेहतर है।महाराज श्री ने कहा अधिक कहने के बजाय थोड़ा कहने, और अधिक बताने में ही समझदारी है।हाँ और ना – यह दुनिया के सबसे प्राचीन दो शब्द है जिसे बोलने में बहुत सोचना पड़ता है…!!!
आज परम पूज्य गुरुदेव अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज जी ससंघ* का भव्य मंगल 👣 पद विहार दिनाँक 14 जनवरी 2026, बुधवार सुबह 7 बजे Mahatma Gandhi Govt. Senior Secondary School
महात्मा गांधी गवर्न्मेंट सीनियर सेकंडरी विद्यालय प्रागपुरा (पावटा) तहसील, कोटपुतली राजस्थान
से गणेशम् पब्लिक उच्च माध्यमिक विघालय, गांव- भाबरु, पंचायत समिति – विराटनगर जिला-जयपुर 18 किलोमीटर के लिए हुआ
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

