निर्यापक श्रमण योगसाग़र जी महाराज दीक्षा दिवस भाव भीनी विनयांजलि
संयम साधना की प्रतिमूर्ति निर्यापक श्रमण पूज्य मुनि श्री योग सागर जी महाराज का हम आज 43 वा मुनि दीक्षा दिवस मना रहे पूज्य मुनि श्री के ने धर्म की ध्वजा को पुलकित किया व जन जन का कल्याण किया पूज्य मुनि श्री का तप संयम सचमुच अद्भुत है
पूज्य मुनि श्री जीवन परिचय पर एक नज़र
पूज्य मुनि श्री का गृहस्थ अवस्था का नाम अंनतनाथ जैन आपका जन्म माता श्रीमती पिता मल्लपा की बगिया मे कर्नाटक के सदलगा बेलगाव मे 13sept 1956 को हुआ आपने स्कूल शिक्षा हाई स्कूल मे मराठी माध्यम से पूर्ण की
मोक्षमार्ग की और प्रथम कदम
जब अनन्तनाथ 19 वर्ष के हुए उनका मन संसार के चक्रव्यूह मे नहीं लगा 2 मई 1975 को आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से राजस्थान के श्रीमहावीरजी तीर्थ पर आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया व् संयम पथ पर बढते बढ़ते गए और आचार्य श्री के करकमलो से 18 dec 1975 को आचार्य श्री विद्यासागर महाराज द्वारा सोनागिर तीर्थ पर उन्हे क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की गयी पायदान एक कदम और आगे बढ़ा और 19 नवम्बर 1977 को सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर मे आचार्य श्री के द्वारा उन्हे ऐलक दीक्षा प्रदान की अब समय आया 15 अप्रैल 1980 का जो इतिहास के पन्नो पर चिरकालिक हो गया आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने मोराजी सागर मुनि दीक्षा प्रदान की गयी आज मुनि दीक्षा के 42 वर्ष पूर्ण किये मुनि श्री ने अपनी ओजस्वी वाणी व संदेशो से जन जन का कल्याण किया इनकी निर्मोहिता राग रंग से परे मुनि श्री ने 200से भी अधिक हाईको लिखे जो सचमुच सारगर्भित है
हम धन्य है जो इन महासाधक के काल मे हमारा जन्म हुआ उनके दर्शन उनकी वाणी का लाभ हमे मिल रहा है यही कामना करते संयम साधना का यह पथ दीर्घकालिक रहे
आओ मिलकर वंदन करे
यह चलते फिरते तीरथ ह
समता रस मूरत हँ
स्वात्म चिन्मुरत है
तम हरने वाले सूरज है
अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
