पोजिटिव सोच बनाओ जिससे आप जी सकें –मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज
अशोक नगर–
पोजिटिव सोच बनाओ जिससे आप जी सकें ये तो शास्त्रों में लिखा है छः दव्य सात तत्व होते हैं भगवान होते हैं इसे तो बच्चे भी बाच देंगे शास्त्रों में लिखा है जो अच्छे कर्म करेगा जिसका आचरण अच्छा होगा सच्चे देव शास्त्र गुरु पर श्रद्धान करता है वह सम्यक दृष्टि होता है वहीं सही शब्दो इंसान होता है महाराज जी ने ही तो कहा है ये तो देशना लब्धी की कहानी है देशना लब्धी में आया है कि सृष्टि कैसी है सृष्टि हमारे जीवन का आधार है सृष्टि के नियमानुसार चले तो हम अपने जीवन को अच्छा बना सकते है।
उन्होंने कहा कि कोई भगोड़ा स्टेशन पर पहुंच कर टिकट मांगता है इतने पैसे में जहां तक का टिकट मिले थे दो टिकिट मांग लिया पर उसे अपनी मंजिल का पता ही नहीं है है उसे ज्ञान नहीं। कहीं ये कहानी हमारी तो नहीं है जो जिस पर्याय में जाता है वहीं रम जाते है। उक्त आश्य केउद्गार सुभाषगंज मैदान में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए

पशुगति को भी कोई जीव छोड़ना नहीं चाहता
आचार्य श्री ने कहा कि हम एक इंद्रिय वाले जीव पेड़ बन गये तो वहीं रम गए एक इंद्रिय पेड़ स्थावर होता है वह वर्षो एक स्थान पर खड़ा रहता है लेकिन अपनी पर्याय को छोड़ना नहीं चाहता हमारे शास्त्रों में तिर्यच गति को पुण्य कहा है और आयु पाप है जितने कीड़े मकोड़े चींटी भी मरना नहीं चाहिए उन्होने कहा कि यदि तुम्हें अनुभव में आ रहा है कि मैं माँ हूँ तो आपको माँ का सब्जेक्ट पढ़ना है, माँ के पेपर में पास होना है कि हमें संतान के लिए अपनी जिंदगी समर्पित करना है, उसके हित में विचार करना है पत्नी यदि है तो जिंदगी में एक साधना करना है कि उसका पति एक दिन एक बात कह दे- मैंने जरूर जन्म जन्म में पुण्य किए जो तुम जैसी संगनी पाई, ये बात हर सम्बन्ध में लगा लेना जिंदगी का पहला लक्ष्य- तुम अपनी दृष्टि में निर्णय करो कि तुम कैसे हो? दुनिया की नजरों में तुम गिरे हो या उठे, ये कोई मायने नहीं रखता, तुम खुद की नजरों में गिरे हुए हो या उठे हुए हो, ये है जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य है।फिर जो हमारे है- मैं और मेरा, जो मेरा है वह कैसा है? मैं अच्छा हूँ तो मेरा मन भी अच्छा होना चाहिए क्योंकि मैं किसी के बारे में बुरा नहीं सोचता। मैं अच्छा हूँ तो मेरी आँख, कान, परिवार, मेरा भगवान अच्छा है।


हम अपने मन में, दिमाग में दुश्मन की बात को स्थान ना दे
उन्होंने कहा कि हम अपने मन में, दिमाग में दुश्मन की बात को स्थान दे देते हैं, दुश्मन की बात हमें लूट लेती है, नींद हराम कर देती है। दुश्मन की बात को दिल में स्थान देना, ये दोनों लुटने व मिटने के लक्षण है। अपनो को घर में व अपनों की बातों को ह्रदय में स्थान देना, यही सबसे बड़े ज्ञानी का लक्षण है जिंदगी का सही उपयोग न करने का कारण है- पहला कारण है संगति वैसी नहीं मिल पा रही, आंखें मूल्यवान है और इनसे क्या देखना है, यह गाइड करने वाला निर्देशक नहीं है, संस्कार और संगति के लिए ही गुरु, सत्संगति, पाठशाला व मंदिर होते हैं।
अच्छी बात हो धर्म की बात हो और दूसरे की हित की भावना को नहीं दबाना चाहिए
उन्होंने कहा अच्छी बात हो धर्म की बात हो और दूसरे की हित की भावना को नहीं दबाना चाहिए और यदि किसी के बुरा करने की भावना है तो दबाना ही चाहिए सच्ची निधि जहां मिलती हो, जहां अच्छे विचार वाले लोग हैं वहां सानिध्य दिया जाता है जिन्होंने तुम्हारे ऊपर उपकार किया है, जो तुम्हारे पूज्य हैं, तुमसे बड़े है, वो किसी भी अवस्था में हो, तुम्हारे लिए शगुन, मांगलिक है, चाहे माँ बाप कोमा में हो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

