36वर्षों से गुरुओं के आशीर्वाद से हम इस पद पर हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्री अशोक पाटनी सुशीला पाटनी आरके मार्बल ने किया ध्वजारोहण 

धर्म

36वर्षों से गुरुओं के आशीर्वाद से हम इस पद पर हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्री अशोक पाटनी सुशीला पाटनी आरके मार्बल ने किया ध्वजारोहण

जहाजपुर आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी संघ सहित स्वस्ति धाम विराजित हैं भारत गौरव गणिनी आर्यिका105 स्वस्तिभूषण माताजी संघ सानिध्य और भारत के राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कोलकाता, कर्नाटक,महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश,गुजरात,देहली,आदि अनेक राज्यों के पधारे भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति पूर्वकाचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 36 वा आचार्य पदारोहण मनाया।बहु प्रतीक्षित घोषणा में आचार्य श्री ने समस्त अटकलों को विराम देते हुए बताया कि संघ के साधुओं की रत्नत्रय सुविधा अनुसार आषाढ़ शुक्ला चतुर्दशी को कलश स्थापना संभावित हैं संघ का वर्षायोग टोंक जिले में संभावित रहेगा। आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी का चातुर्मास जहाजपुर में होगा।संघ 28 जून को 4.5किलोमीटर विहार कर आहार चर्या गौतम आश्रम जहाजपुर में हुई । 27 जून को आचार्य श्री ने धर्म उपदेश में बताया कि आज 36 वा वर्षायोग है । सांसारिक प्राणी 8 कर्मों के संचय मोह कषाय , इंद्रिय भोगों के कारण दुखी है विषय और कषाय महान शत्रु है आचार्य श्री शांति सागर जी ने मोक्ष का मार्ग बतलाया अपने वास्तविक मोक्ष घर के सुख के लिए बहुत त्याग कर पुरुषार्थ करके जीवन में परिवर्तन लाना होता है यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने 36में आचार्य पदारोहण के अवसर में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की।राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आगे बताया कि धर्मशासन श्रद्धा से व्यक्ति जीवन को महान बना सकता है धर्म चरित्र को अपना कर श्री शांति सागर जी ने धर्म की अलख जगाई। महानतम साधु चरित्र को जीवन में अपना कर सफलता प्राप्त करते हैं।आचार्य श्री ने बताया कि आचार्य शांति सागर जी ने मुनि मार्ग को पुनर्जीवित किया ।20 वी सदी मे आचार्य शांति सागर जी महाराज ने हमें धर्म और मुनि मार्ग को बतलाया। जिनालय जहां भगवान विराजित होते हैं उसके संरक्षण के लिए आचार्य शांति सागर जी ने 1105 दिनों तक अन्न आहार का त्याग किया जिनालय में दर्शन अभिषेक पूजन स्वाध्याय कर जीवन को उन्नत बना सकते हैं जीवन की सार्थकता भगवान के दर्शन पूजन स्वाध्याय तप उपवास से है आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज जी आचार्य होकर चारित्र चक्रवती थे उनकी परंपरा के आचार्य धर्मसागर जी महाराज से सन 1969 में दीक्षित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को आचार्य श्री अजित सागर जी के लिखित आदेश से 24 जून 1990 आषाढ़ सुदी दूज को पारसौला में आचार्य पद दिया गया ।75 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 36 वा आचार्य पदारौहण सहित समस्त भारत देश विभिन्न प्रांतो से स्वस्ति धाम जहाजपुर पधारे हजारों भक्तों ओर आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी की महती उपस्थिति में भक्ति और उत्साह से मनाया गया। राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार प्रातः काल 5:00 बजे से भक्ति आचार्य श्री के दर्शन संपूर्ण संघ ने आचार्य श्री की परिक्रमा लगाकर भक्ति कर चरण वंदना की ।मंदिर से मांगलिक भवन परिसर के लिए संघ का आगमन हुआ ।सर्वप्रथम झंडावंदन आदरणीय अशोक पाटनी किशनगढ़ द्वारा किया गया। पंडाल उदघाटन सुनील जौहरी मुंबई ने किया ।धर्म सभा में उपदेश के पूर्व मंडप पांडाल उदघाटन सुनील जवेरी परिवार मुंबई, ध्वजारोहण और दीप प्रवज्जलन श्रीमती सुशीला अशोक जी पाटनी किशनगढ़ आचार्य शांतिसागर जी एवं पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण जहाजपुर कमेटी ,द्वारा , तथा कलश स्थापना राजेंद्र कटारिया अहमदाबाद ने किया ।विनयांजलि सभा में अनेक श्रावक श्राविकाओं , गणिनी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने गृहस्थ अवस्था में वर्ष 1993 में ,महावीर जी में वर्ष 2022 में दर्शन से प्राप्त स्नेह वात्सल्य और गुणों की मुक्त कंठ से गुणानुवाद किया। आपने आचार्य श्री से जहाजपुर में वर्षायोग करने का निवेदन किया। आर्यिका 105श्री महायशमति माताजी ,मुनि श्री108 हितेंद्र सागर जी महाराज श्री ने अपने गुरु के प्रति विनयांजलि दी नवीन पीछी आचार्य कल्प श्री पुण्य सागर जी महाराज संघ की ओर से विकास भैया दीदीयो तथा रायपुर के निर्मल सुबोध ,सुशील छाबड़ा ने नवीन पीछी आचार्य श्री को भेंट की आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने इस अवसर पर बताया कि आज 36 वर्षों से हम इस पद पर हैं तो उसके लिए सन 1968 ग्रहस्थ अवस्था से लेकर वर्तमान तक हमें आ 105श्री सुपार्श्वमति आ 105श्री ज्ञानमती ,आचार्य श्री 108विमल सागर जी, आचार्य श्री 108शिवसागर जी, आचार्य कल्प 208श्री श्रुत सागर जी, आचार्य 108धर्मसागर जी ,आचार्य108 अजीत सागर जी सहित अनेक साधुओं का हमें संबल मिला हमें सहारा मिला और उनसे हमने ज्ञान प्राप्त किया और हमारे वैराग्य के कारण भी माताजी है आज हम जो कुछ है वह पूर्व आचार्यों के आशीर्वाद से हैं। आचार्य श्री की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य अरविंद मेहता मंदसौर को प्राप्त हुआ।समर्थ,महेंद्र,विमल पाटनी सहित पुण्यार्जक परिवारो को चरण प्रक्षालन ओर जिनवाणी भेंट का सौभाग्य मिला।

विशेष उपस्थितिजैन भामाशाह आदरणीय अशोक जी पाटनी किशनगढ़ ,परिवार सहित उपस्थित रहे।

श्री अशोक सेठी बैंगलोर, श्री राजेंद्र कटारिया,श्री राजेश शाह अहमदाबाद, श्री विवेक काला जयपुर,श्री भरत , श्री किशोर ,राजेश पंचोलिया , श्री विनोद पाटनी, श्री संजय पापड़ी वाल,महेंद्र,विमल पाटनी,गौरव पाटनी,श्री सुबोध छाबड़ा राजनांदगांव,श्री सुनील जवेरी मुंबई ,श्री राजकुमार सेठी,श्री राकेश सेठी जयपुर आदिराजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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