हर पाषाण में भगवान छिपा है बस उसे पहचानने और तराशने की आवश्यकता है प्रमाण सागर महाराज

धर्म

हर पाषाण में भगवान छिपा है बस उसे पहचानने और तराशने की आवश्यकता है प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
हर पाषाण में भगवान छिपा है, बस उसे पहचानने और तराशने की आवश्यकता है।”उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने श्री विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में गर्भ कल्याणक उत्तरार्ध दिवस पर व्यक्त किये।

 

 

मुनि श्री ने जीवन के चार सूत्रों पर विशेष बल देते हुए कहा की श्रद्धा शोधन वैराग्य और संयम से जीवन की दिशा और दशा बदल सकती है उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक केवल एक धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर भगवान को प्रकट करने की एक साधना है इसे केवल कार्यक्रम न मानें यह आत्मा के रुपांतरण का अनुष्ठान है।

मुनि श्री ने भारतीय संस्कृति का सार बताते हुये कहा कि जैसे भगवान पाषाण से प्रकट होते है उसी प्रकार यह आत्मा ही परमात्मा बनती है उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक में भाग लेना केवल दर्शक होना नहीं है बल्कि आत्मा के कल्याण का यह पहला कदम है उन्होंने तीर्थंकरों के जीवनयात्राओं के प्रसंगों को सुनाते हुये कहा कि उनकी जीवन यात्रा संघर्षों और उपसर्गों से भरी रही है उन संघर्षों को सहने के पश्चात ही वह परमात्मा बने उन्होंने कहा कि जीवन को केवल घटना न बनायें उसे घटनाओं से ऊपर उठकर चेतना की साधना बनायें।

मुनि श्री ने कहा कि आप लोग यह पांच दिन का पंचकल्याणक देखने नहीं बल्कि अपने जीवन को बदलने आये हो इसे केवल आयोजन नहीं आत्म जागरण की प्रक्रिया बनाओ अंत में मुनि श्री ने अंत में प्रेरणात्मक वाक्य बोलते हुये कहा कि “एक सीढ़ी चढ़ के सो,जिस जगह जागो सवेरे,उस स्थान से बड के सो” यह संदेश प्रत्येक साधक के लिये एक संकल्प की तरह गूंजता रहा।

 

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया पंचकल्याणक कार्यक्रम के अन्तर्गत श्री पार्श्वनाथ भगवान की भव्य यात्रा निकाली गयी अवधपुरी में बना पांडाल मंत्रोच्चारण से गूंज उठा श्रद्धालुओं की आंखों में छलकती आस्था आयोजन को दिव्यता के शिखर पर ले गया कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया एवं अभय भैया ने किया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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