अंतर्मना प्रसन्न सागर महाराज का मंगल विहार हरिद्वार की और
अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज का पदविहार उत्तराखण्ड के बद्रीनाथ से हरिद्वार के लिए चल रहा है। आचार्य श्री ने 2 दिवस में बद्रीनाथ से 77 किलोमीटर की दुरी की तय निरंतर चल रहा है मंगलमय पदविहार होटल महेश आनंद जिला चमोली में ससंघ की निर्विघ्न आहारचर्या संपन्न हुई।
आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में कहा की आदमी धर्म से विमुख नहीं हो रहा है..बल्कि धर्म ही आदमी से विमुख हो रहा है..!
क्योंकि मन, वचन और काय तीनों की एक रूपता बिना धर्म की आत्मा को समझ पाना संभव नहीं है। मन, वचन और काय की समरूपता ही धर्म है, धर्म आडंबर और प्रदर्शन नहीं माँगता, धर्म केवल मन की सरलता माँगता है।
तुमने कितनी पूजाएं की-? कितनी सामायिक की-? कितने प्रतिक्रमण किये-?

यह महत्वपूर्ण नहीं है। अपितु तुमने किन भावों से पूजा की, कितने गहरे भावों से प्रार्थना की, कितनी तन्मयता से भक्ति की है, यह बहुत महत्वपूर्ण है।


उन्होंने कहा परमात्मा
के दरबार में गणित नहीं चलती है,, गणित का महत्व ही नहीं है। परमात्मा के द्वार में क्वालिटी का महत्व होता है, क्वांटिटी का नहीं।परमात्मा गणित का भूखा नहीं है.वह तुम्हारे भावों का भूखा है…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




