पैसा’ अल्पकालिक सुख जरूर दे सकता है, लेकिनदीर्घकालिक सुख शांति चाहिये तो आध्यात्मनिष्ट बने प्रमाण सागर महाराज|
भोपाल
‘पैसा’ अल्पकालिक सुख जरूर दे सकता है, लेकिन दीर्घकालिक सुख शांति चाहिये तो आध्यात्मनिष्ट बने उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने सिद्धार्थ लेकसिटी भोपाल में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये
उन्होंने कहा कि पैसा पैसा पैसा कमाने में ही अपनी दृष्टि लगा
रखी है, आपने अपने जीवन का अंतिम लक्ष्य सुख शांति और समृद्धि पाने की बना रखी है, क्या वह सुख शांति आपको मिली?
उन्होंने पूछा बताओ आज से 25 वर्ष पहले जो सुख शांति थी वह अच्छी थी या आज अच्छी है? आपके पास जो 25 साल पहले पैसा था वह तो बढ़ गया लेकिन जो सुख शांती पहले थी वह घट गयी, इसका मतलब है किपैसा आपको सुख शांति नहीं दिला सकता हैं,सुख शांति मिलेगी तो आध्यात्मिक चेतना से ही मिलेगी।
आचार्य श्री कहते है कि जबदवा काम नहीं करती तो दुआ काम करती हैं इसलिये अपनी दृष्टि को बदलो मुनि श्रीने कहा कि इच्छायें चीजों को जुटाती तो है लेकिन इच्छाओं का अंत नहीं, जैसे खाजखुजाकर खाज मिटाने का असफल प्रयत्न करना न भूतो न भविष्यति खाज मिटाना है तो मरहम लगा लो उसी प्रकार अपने जीवन की तृष्णा को अपने जीवन की आसक्ति को जो हमारे दुःख का मूल कारण है उसे मिटानेके लिये सम्यक् पुरुषार्थ करने की जरुरत हैवही धर्म पुरुषार्थ है, वही आध्यात्म है।
मुनिश्री ने सम्वोधित करते हुये कहा कि अर्थ के पुरुषार्थ पर चल कर देख लिया अब परमार्थका आश्रय लेकर देखो कितना आनंद आताहै भोगों का आश्रय लोगे तो व्याकुल होगे आत्मा से नाता जोड़ोगे आनंद में रहोगे। इसअवसर पर मुनिश्री निर्वेगसागर जी मुनिश्री संधान सागर जी एवं समस्त क्षुल्लक एवं संघस्थ ब्रहम्चारी मौजूद थे। संचालनअशोक भैयाजी लिधोरा ने किया, मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के आहार का सौभाग्य श्री मति निशा अजय जैन सिद्धार्थ लेकसिटी परिवार को मिला
अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




