परम पूजनीय स्वस्तिभूषण माताजी का केकड़ी नगर में हुआ भव्य मंगल प्रवेश क्षेत्रीय विधायक शत्रुघ्न गौतम ने आर्यिका संघ की अगवानी की
केकड़ी
श्री नेमिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर बोहरा कॉलोनी धर्मनगरी केकड़ी में भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी का भव्य मंगल प्रवेश हुआ।
जानकारी देते हुए समाज अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ज्वेलर्स ने बताया कि देवली कोटा सावर तिराहे पर माननीय विधायक शत्रुघ्न गौतम ने समाज के जनसैलाब के साथ अगुवानी की ।
कोटा रोड तिराहे से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। जगह जगह भक्तों ने पलक पावड़े बिछाकर पाद प्रक्षालन मंगल आरती करते हुए माताजी की आगवानी की।

संपूर्ण शोभायात्रा का मार्ग
स्वागत द्वार, बैनर पोस्टर से अटा हुआ था मंत्री कैलाशचंद जैन मावा वालों ने बताया कि शोभायात्रा बस स्टैंड अजमेरी गेट, घंटाघर,जैन चैत्यालय, आदिनाथ मंदिर होते हुए श्री नेमिनाथ जैन मंदिर बोहरा कॉलोनी पहुंची।
शोभायात्रा में शुभकामना परिवार के 14 समूह ने 14 स्वागत द्वार बनाकर गुरु मां संघ की भव्य आगवानी की।
गुरु मा की आगवानी में सकल दिगम्बर जैन समाज महिला मंडल राजुल महिला मंडल ,शांतिनाथ बहू मंडल,विशुद्ध वर्धिनी महिला मंडल, आदिनाथ बहू मंडल, वामा महिला मंडल, त्रिशला महिला मंडल, दिगंबर जैन महिला मंडल , महिला महासमिति सकल दिगंबर जैन समाज की सभी महिलाएं व पुरुष सम्मिलित हुए ।
शोभायात्रा में मां विशुद्ध महिला जयघोष विशेष आकर्षण का केंद्र बिंदु रहा। यह शोभायात्रा बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ जैन मंदिर पहुँचकर धर्मसभा में परिवर्तन हो गई।
धर्मसभा में सर्वप्रथम भगवान महावीर ,आचार्य श्री ज्ञान सागर व आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर महाराज के चित्र अनावरण व दीप प्रज्जवलन पदमचंद पाटनी देवली,विनोद जैन पारस चैनल कोटा, अनिल मित्तल, गोविंद जैन सदारा,बीजेपी नगर अध्यक्ष रितेश जैन व सभी जैन मंदिरों के अध्यक्ष गणों द्वारा किया गया । पाद प्रक्षालन भागचंद ज्ञानचंद सुनील कुमार जैन ज्वेलर्स ने किया । माताजी को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य पारसमल महावीर प्रसाद बघेरा,ओम प्रकाश गोविंद जैन सदारा, व कैलाश चंद पीयूष कुमार जैन मावा वालों को प्राप्त हुआ। धर्मसभा के प्रारंभ में राजुल महिला मंडल की अध्यक्ष चंद्रकला जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसी के साथ अनुष्का, वारिधि व साक्षी ने ने सुन्दर भक्ति कर मंगलाचरण प्रस्तुत किया ।
जैन धर्म के अर्थ को समझने के लिए और अनेकांतवाद और स्यादवाद
सिद्धांत को समझना आवश्यक है स्वस्तिभूषण माताजी
गणिनी गुरु मां स्वस्ति भूषण माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में जैन धर्म का अर्थ बताते हुए कहा कि अनेकांतवाद ओर स्यादवाद ये दो सिध्दांत है जो जैनधर्म को समझने के लिए आवश्यक है ।
उदाहरण के माध्यम से माताजी ने समझाया किचीनी केवल मिठास से नहीं जानी जाती अपितु उसकी सफेदी, घुलनशीलता,व दाने से जानी जाती है ।अग्नि गर्म,ताप, प्रकाशक व भस्मक व दाहक के लिए पहचानी जाती है ।
एक ही महिला को दादी,नानी,मां,बहिन,भुआ, चाची बहुत से संबोधन मिलते है ।
एक ही महिला अलग अलग व्यक्ति के लिए अलग अलग संबोधन हो सकती है ।इसका अर्थ यह है कि महिला के लिए कोई भी संबोधन गलत नहीं है ।
यही अनेकान्त वाद व स्यादद्वाद होता है ।जिस प्रकार अंक 6 को आमने सामने वाला व्यक्ति 6 व 9 बताते हुए झगड़ता है ।जबकि दोनो अपनी जगह सही होते है ।
युवाओं की और ध्यान इंगित करते हुए माताजी ने कहा कि युवा
अनेकान्तवाद को समझने पर कषाय कम व धर्म की प्राप्ति कर सकते है, व समता धैर्य होने पर सुख प्राप्त कर सकते है ।
संपूर्ण जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी रमेश बंसल
पारस जैन ने बताया की प्रतिदिन शाम को 7 बजे माताजी के सानिध्य में शिवम वटिका में आनंद यात्रा का आयोजन किया जाएगा ।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312







