कम शब्दों से ज्यादा बात सत्कर्म करो और स्वयं पर भरोसा रखो प्रसन्न सागर महाराज
क्वारबतल्ला
आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा की धन कहता है – मुझे जमा करो,समय कहता है – मुझे समझो,भविष्य कहता है – मुझे सॅंवारो,रूप कहता है – मुझे निहारो,कलेण्डर कहता है – मुझे पलटो,लेकिन मैं कहता हूँ, कम शब्दों में ज्यादा बात – सत्कर्म करो और स्वयं पर भरोसा रखो..!
महाराज श्री ने कहा वस्तु विकारी नहीं है, उसके प्रति आसक्ति पूर्ण विचार ही विकार को जन्म देते हैं। संसार में रहना बुरा नहीं है अपितु मन में संसार को बसा लेना बुरा है। पानी में तैरने वाला सागर से पार हो जाता है परन्तु उसमें डूबने वाला वहीं मर जाता है। इसलिए संसार में तैरना है, डूबना नहीं। क्योंकि सृष्टि का कण कण अपने परिणमन के लिए पूर्ण स्वतन्त्र है। अपने सुख और दु:ख, उन्नति और अवनति, स्वर्ग और नर्क के लिये हम स्वयं अपने उत्तरदायी हैं प्रकृति स्वयं अपने द्वारा संचालित है।
सृष्टि का संचालक परमात्मा नहीं, प्रकृति है। इसलिए सब आटोमेटिक चल रहा है। जैसे हम भोजन करते हैं तो पेट में गया अन्न विविध धातुओं में आपोआप परिवर्तित हो जाता है। उसी प्रकार अच्छे बुरे कर्म ही हमारे सुख दु:ख में कारण है, और कोई नहीं
एक फल वाले ने अपनी दुकान पर लिखकर रखा था आप तो कर्म करो – फल तो हम दे देंगे…


!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
