हमें रास्तों की जरूरत नहीं है मुझे तेरे पैरों के निशा मिल गए है प्रसन्न सागर महाराज
कानपुर
आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में समस्त भक्तो को अहिंसा के मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित किया!

उन्होंने एक गीत के माध्यम से कहा
*हमें रास्तों की जरूरत नहीं है..*
*हमें तेरे कदमों के निशां मिल गये हैं..!
हाथों ने पैरों से पूछा उन्होंने बताया की सब तुम्हारे चरण छूते हैं, प्रणाम करते हैं, मुझे क्यों नहीं-? पैरों ने कहा* – उसके लिए जमीन पर रहना पड़ता है, हवा में नहीं। दूसरी बात – लोग चरण नहीं आचरण छुते हैं।
जंगल में राम और सीता दोनों एक पेड़ के नीचे बैठे थे। अचानक लक्ष्मण आ गये। सीता ने हँसते हुये लक्ष्मण से कहा* – देवर जी, एक बात पूछूं-? लक्ष्मण बोले हाँ भाभी – क्या पूछना है, पूछो-? सीता ने अपना पैर राम के पैर के पास करके पूछा? बोली* – किसके चरण सुन्दर है-? लक्ष्मण असामंजस्य में पड़ गये! यदि सीता के पैर सुन्दर बोलते हैं तो राम गुस्सा हो जायेंगे, और राम के पैर सुन्दर बोलते हैं तो सीता गुस्सा हो जायेगी।

लक्ष्मण ने बुद्धि चातुर्य का कौशल दिखाते हुये कहा – भाभी, भाई के चरण सुन्दर है क्योंकि उनके चरण, आचरण से युक्त है, और आपके पैर इसलिए सुन्दर है क्योंकि वो आचरण का अनुकरण कर रहे हैं।






लक्ष्मण की बात सुनकर राम सीता दोनों खुश हो गये…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
