चंपू काव्य के लोकार्पण के साथ विद्वत संगोष्ठी संपन्न

धर्म

चंपू काव्य के लोकार्पण के साथ विद्वत संगोष्ठी संपन्न
सतना!
श्री दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित मूक माटी महाकाव्य एवं चंपू काव्यम पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का द्वितीय दिवस आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में स्थानीय विद्या सभागार पुराना पावर हाउस मैदान में संपन्न हुआ! मुख्य अतिथि के रूप में सतना लोकसभा क्षेत्र के सांसद गणेश सिंह एवं मध्य प्रदेश शासन की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी उपस्थित रहे!

 

 

मंगलाचरण श्रीमती सुरभि महेश जैन एवं श्रीमती वंदना जैन द्वारा किया गया! सत्र का शुभारंभ आचार्य भगवान श्री समय सागर जी की पूजन के साथ संपन्न हुआ! आचार्य श्री की पूजन करने का सौभाग्य बाहर से पधारे विद्वत जनों को प्राप्त हुआ! आचार्य भगवान को चंपू काव्य भेंट करने का सौभाग्य डॉ सोनल कुमार जैन दिल्ली को प्राप्त हुआ !मंच का संचालन बुरहानपुर से पधारे डॉ सुरेंद्र कुमार जैन के द्वारा किया गया! अध्यक्षता डॉ अभिराज राजेंद्र मिश्र द्वारा की गई !सभी आमंत्रित विद्वानों का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान श्री महावीर दिगंबर जैन पारमार्थिक संस्था के द्वारा किया गया!

जीव दया का भाव है चंपू काव्य

धीवरोदय चंपू काव्य की मूल्यत्मक मीमांसा करते हुए डॉ सोनल कुमार ने बताया कि किसी वस्तु की उपयोगिता का नाम मूल्य है! आचार्य भगवान ने धीवर को प्रथम मछली को छोड़ने का उपदेश दिया! उसे एक ही मछली चार बार मिलती है! और वह धीवर उसे हर बार छोड़ देता है! यह संदेश हमें धीवरोदय काव्य देता है कि जिस प्रकार कन्यादान उत्तम है ,उसी प्रकार जीव दया भी सर्वोत्तम है! इस ग्रंथ में सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक ,नैतिक सभी मूल्य है !इसके मंगलाचरण में तीन विशेषताओं का प्रयोग हुआ है !यह सर्वोदय की बात है !इस ग्रंथ के मंगलाचरण में आठ पद हैं !जो आठ कर्मों के निग्रह का प्रतीक है! जो धीवरोदय में है वह संपूर्ण जैन वांगमय में है! और जो संपूर्ण जैन वांगमय में है वही धीवरोदय में है !

 

 

 

राजेंद्र मिश्रा ने आचार्य श्री के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सारे के सारे कवि या तो नदी की तरह है या प्रकाश या प्रताप की तरह है! परंतु मेरी दृष्टि में आचार्य श्री विद्यासागर जी उन सब के संगम है! वे महाकवि है !अपने जीवन काल में उन्होंने चंपू काव्य दिया है! जिसके साथ बुद्धि है, वही धीवर है!वही परम सत्ता को प्राप्त होता है!

परम पूज्य निर्यापक श्रमण श्री अभय सागर जी ने चंपू काव्य के विषय में प्रकाश डालते हुए बताया कि भाग्योदय तीर्थ सागर में 1998 में आचार्य श्री के द्वारा इस कृति का लेखन प्रारंभ हुआ और 4 वर्षों के उपरांत 2002 में यह काव्य आचार्य श्री के द्वारा लिखकर पूर्ण हुआ! मूक माटी में नारी के अनेक पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग हुआ है! वर्तमान में समाजवाद की चर्चा बहुत होती है! मूक माटी में समाजवाद की व्याख्या नवीन अर्थ सहित की गई है! मूक माटी के संस्कृत अनुवाद को मैंने शुद्ध से 6 माह तक पड़ा और अपने सुझाव प्रेषित किया! धीवरोदय का भी संस्कृत अनुवाद करने का प्रयास किया जा रहा है! आचार्य श्री की रचनाओं की पांडुलिपियों का संग्रह एक स्थान पर करने का प्रयत्न किया जा रहा है !

विद्वत संगोष्ठी को संबोधित करते हुए परम पूज्य आचार्य समय सागर जी महाराज ने कहा कि श्रमण मुनि अभय सागर जी ने अनेक संदर्भों को आपके सामने रखा! मैं शांतिपूर्वक आनंद का अनुभव कर रहा था! दोनों कृतियों पर जो चर्चा हुई उस पर विचार करते हुए अपने परिणामों को निर्मल बनाने का उपक्रम कीजिए! हमें अपने जीवन में प्रभु और गुरु के उपकार को भूलना नहीं चाहिए! और हमेशा उनकी आराधना में अपने जीवन को व्यतीत करना चाहिए!

आचार्य श्री से किया निवेदन


श्री महावीर दिगंबर जैन परमार्थिक संस्था सतना के द्वारा, समाज के पूर्व अध्यक्ष, विद्वत जन, सभी सामाजिक संगठनों के द्वारा आचार्य श्री ससंघ के श्री चरणों में श्रीफल अर्पित कर शीतकालीन वाचना हेतु निवेदन किया गया! साथ ही साथ समाधि सम्राट आचार्य परमेष्ठी श्री विद्यासागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस 6 फरवरी को सतना में आचार्य संघ के सानिध्य में हो ऐसा निवेदन किया गया! पूज्य श्रमण मुनि अभय सागर जी ने शास्त्री परिषद और विद्वत परिषद के अध्यक्षों से आवाहन किया कि आप सभी विद्वान अपने-अपने नगरों में उपरोक्त तिथि में स्मरण दिवस का आयोजन अवश्य करें!
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किया गया आभार व्यक्त
श्री महावीर दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष डॉ अरविंद द्वारा विद्वत संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ पूज्य श्रमण मुनि अभय सागर जी महाराज ससंघ एवं रिजुमति माताजी ससंघ के श्री चरणों में नमन करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की !वहीं इस संगोष्ठी में सहभागिता दर्ज करने बाहर से पधारे हुए विद्वानों के प्रति साधुवाद ज्ञापित किया एवं इस संगोष्ठी में श्रोता के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करने वाले शहर के गणमान्य नागरिकों एवं संगोष्ठी को सफल बनाने में तन मन से कार्य करने वाले समस्त कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया!
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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