- काव्य जगत की ज्योति अनामिका अम्बर जन्मदिन पर विशेष
काव्य जगत की ज्योति
काव्य रचनाए जो बन गई मोती
हिदी साहित्य की तुम ज्योति
ज़ब भी तुम रचना लिखती, बोलती एक नया इतिहास लिख देती
आज मेरे शब्द रूपी मोती तुम्हे शुभकामना देती
एक विवरण
जो भी साहित्य जगत व काव्य रचनाओ में रुचि रखता, उसके लिए अनामिका जैन अम्बर का नाम किसी से अछूता नही है।
21मार्च 1983 मे बुंदेलखंड के ललितपुर जिले के धनगौल ग्राम में उनका जन्म हुआ. उनके पिता श्री उत्तम चंद जैन ललितपुर शहर के नामी वकील में से एक हैं. इनकी माता श्रीमती गुणमाला जैन एक गृहणी हैं.
शिक्षा
अनामिका ने शुरुआती शिक्षा ललितपुर के कोंवेंट विद्यालय में की।लौकिक शिक्षा तो ग्रहण की है, साथ ही। इनके माताजी जो धार्मिक है, उन्होंने इनके भीतर भी धार्मिक सँस्कार भी कूट कूट के भरे।
रुचि
बचपन से ही हिंदी साहित्य काव्य रचनाओं के प्रति इनकी अभिन्न रुचि रही।उन्हें उनके मित्र भी ऐसे ही मिले जो काव्य रचनाओं में रुचि रखते थे। यही साथ आज उन्हें काव्य जगत का सरताज बना चुका है।
शिक्षा
बारहवी कक्षा के अध्ययन के बाद सी.पी.एम.टी. में हुआ आप परिवार की लाडली इकलौती बेटी है इसलिए उन्हें अध्यन हेतु दूर नही भेजा गया। बाद में उन्होंने ग्वालियर के जीवाजी विश्व विद्यालय से विज्ञान में स्नातक एवं परास्नातक को उत्तीर्ण किया. शिक्षा के प्रति उनकी रुचि उन्हें वाचस्पति की डिग्री प्राप्त करा गई.साथ ही जीवाजी यूनिवर्सिटी से ही उन्होंने Ph.D. किया.
अनामिका सौरभ को काव्य जगत का प्रथम विख्यात कवि युगल होने का गौरव हासिल
अनामिका की मुलाकात हिंदी काव्य मंचों के युवा कवि सौरभ जैन सुमन के साथ उनकी मुलाकात हुई. दोनों की जोड़ी को हिंदी मंचो पर पसंद की जाने लगी।
6 वर्ष तक लगातार एक साथ कविता के मंच करने के उपरांत सन 2006 में दोनों ने घर वालों की रजामंदी से विवाह किया. साथ ही आलम यह हुआ आगे चलकर हिंदी काव्य मंचों का प्रथम विख्यात कवियुगल होने का गौरव भी प्राप्त किया. कही नामी ऐसे हैं जिन्होंने हिंदी मंचों पर एक दुसरे को जीवन साथी के रूप में चुना हो। पर सौरभ सुमन-अनामिका अम्बर में विशेष ये रहा की विवाह के उपरांत भी दोनों मंच पर अपनी साँझा प्रस्तुति देते रहे। और सफलता का स्वर्णिम शिखर पा गए।
मार्मिक काव्य रचनाए
अनामिका द्वारा कही मार्मिक रचनाए है। जो सत्य बताती है जिसमें शहीद का बेटा, औरों की पीर देख झलक,जहां पर देव दर्शन हो वही भव पार होता है जैसी रचनाओं के साथ बेटी पर आधारित काव्य रचनाओं ने एक छाप छोड़ी। साथ ही काव्य जगत को एक नई पहचान दी। आप सचमुच जैन जगत का गौरव है।
आज के पावन दिन हम यही शुभकामना देते है आप दीर्घायु हो और काव्य जगत,हिदी साहित्य को नवीन ऊँचाई देते हुए अभिव्रद्धि की और अग्रसर हो।
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
