आचार्य वर्धमान सागर की शिष्या आर्यिका श्री तपनमति जी ने नियम संलेखना धारण कर संस्तरारोहण किया

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आचार्य वर्धमान सागर की शिष्या आर्यिका श्री तपनमति जी ने नियम संलेखना धारण कर संस्तरारोहण किया
पारसोला आचार्य शिरोमणी *पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 85 वर्षीय आर्यिका श्री तपनमति माताजी ने* आज दिनांक 8 दिसंबर 2024 को वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश निर्यापकाचार्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी समक्ष श्रीजी,आचार्य श्रीसंघ सहित सभी साधुओं से क्षमा याचना कर संस्तरारोहण किया।क्षपक साधु जिस स्थान पर बैठते ,लेटते हैं उसे संस्तर कहते हैं और उस पर बैठना, उठना आरोहण कहलाता है इस प्रकार संस्तरारोहण किया जाता है। क्षपकोतमा साघु जीवित अवस्था में संयमी जीवन में क्रम पूर्वक आहार का त्याग कर रही हैं। आर्यिका श्री तपनमति माताजी के तप, त्याग की अनुमोदनाएक परिचयब्रह्मचारी गज्जू भैया एवं राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया किपोष शुक्ला दशमी विक्रम संवत 1991 को श्रीमती मथुरा देवी पिता लक्ष्मण जी के यहां जन्मी पानी देवी का जन्म कूण जिला उदयपुर में हुआ। आपका विवाह श्री भगवान दास लालावत से हुआ। आपने 11 अगस्त 2024 को पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज से आर्यिका दीक्षा पारसोला में ग्रहण की। अभी आप एक दिन छोड़कर आहार में मात्र तरल पदार्थ ही ले रही है तीनों प्रकार के आहार का त्याग कर दिया है। उल्लेखनीय कि आपकी पुत्री भारती ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 29 अप्रैल 2015 को आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर वर्तमान में आचार्य श्री के संघस्थ होकर आर्यिका श्री समर्पित मति के रूप में विद्यमान है।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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