विषय भोग से मनुष्य पर्याय का उद्धार नहीं दुरुपयोग होता हैं- मुनिश्री निर्मद सागर महाराज
रामगंजमंडी
परम पूज्य मुनिश्री 108 नीरज सागर महाराज एवम पूज्य मुनिश्री108 निर्मद सागर महाराज के सान्निध्य में नगर में महती धर्म प्रभावना हो रही है। सोमवार की प्रातः बेला में मुनिसंघ ने श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन नसिया के दर्शन कि, दर्शन उपरांत श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा हुई धर्म सभा में सर्वप्रथम आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की पूजनोपरांत अभिषेक जैन लुहाड़िया ने मंगलाचरण की अलौकिक प्रस्तुति दी मंगल प्रवचन देते हुए सर्वप्रथम मुनि श्री 108 निर्मद सागर महाराज ने कहा कि हमें जैन धर्म एवं उच्च कुलप्राप्त हुआ एवं मनुष्य योनि प्राप्त हुई। लेकिन हम उत्तम कुल और मनुष्य पर्याय को विषय भोग में लगा रहे हैं। और हम मनुष्य पर्याय का उपयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल रसना इंद्रिय के दो विषय होते हैं एक चकना और एक बकना मनुष्य रसना इंद्रीय के वशीभूत होकर कार्य करता है। मुनिश्री ने कहा कि संयम अपने आप में सुख देने वाला है संयम शुरू में कठिन लगता है लेकिन बाद में सहज सरल हो जाता है और संयम धारण करके देखो कितना आनंद आता है। उन्होंने कहा कि भगवान बनने की पात्रता मनुष्य में है संयम जीवन में आए यह तभी मनुष्य पर्याय पाने की सार्थकता है। जब किसी व्यक्ति का समाधिमरण होता है तो उसे बिठाकर इसलिए रखा जाता है क्योंकि उन्होंने अपना जीवन संयम की ओर अग्रसर कर सार्थक किया है। उन्होंने कहा कि जीवन रंगमंच की तरह है इस रंगमंच में सब अपना- अपना ड्रामा प्ले कर रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि हमें यह पता चले कि हम पैदा क्यों हुए हैं और हमें क्या करना है? उन्होंने कहा की मृत्यु का भय पाप से बचाता है। भगवान बनने की पात्रता मनुष्य में है।
पूज्य मुनि श्री नीरज सागर महाराज ने भी संयम के विषय में बताया एवं उन्होंने समाधिस्थ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को स्मरण करते हुए कहा कि आचार्य श्री संध्या में भक्ति करने के बाद आते तो तब चर्चा करते थे और जैसे ही वह घड़ी की सुई की ओर देखते समय होने पर वह
ध्यानस्थ हो जाते थे ।आचार्य श्री आत्मयोगी, साक्षात् परमात्मा एवं आध्यात्मिक योगी थे। उन्होंने अपने जीवन में संस्कारों को डाला। पूज्य मुनि श्री नीरज सागर महाराज की मंगल आहारचर्या एवं चरण वंदना का लाभ निर्मल कुमार निलेश कुमार लांबाबास परिवार को एवं उपवास उपरांत निर्मद सागर महाराज की







आहारचर्या चरण वंदना का लाभ राजमल पदमकुमार लुहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
