संस्कार के कारण ही जीवन में परिवर्तन की लहर दौड़ती है। जैसे संस्कार होंगे वैसा ही परिवर्तन होगा। प्रज्ञा सागर महाराज

धर्म

संस्कार के कारण ही जीवन में परिवर्तन की लहर दौड़ती है। जैसे संस्कार होंगे वैसा ही परिवर्तन होगा। प्रज्ञा सागर महाराज
झालरापाटन।

दिगंबर जैन समाज के 10 लक्षण पर्व के तहत सोमवार को उत्तम आकिंचन धर्म को अंगीकार कर विशेष पूजा अर्चना की गई। दिगंबर जैन समाज के सभी मंदिरों में सुबह शांति धारा, भगवान की प्रतिमाओं के अभिषेक के साथ नित्य नियम और 10 लक्षण की पूजन हुई। शांतिनाथ बाड़ा में आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज के सानिध्य में विधानाचार्य राजकुमार जैन बैंक वाला ने संगीतकार कटनी निवासी पदमचंद के मधुर स्वर लहरियों के साथ विधान की पूजन करवाई। जिसमें मंगलाचरण मीना दीदी ने किया। सोधर्म इंद्र बने हेमंत कुमार समकित कुमार जैन के साथ अन्य पुरुष एवं महिलाओं ने पूरे भक्ति भाव के साथपूजन की। आचार्य ने कहा कि किंचित भी बाहरी संबंध रह जाता है तो साधक की साधना पूरी नहीं हो पाती है। वह तब तक निष्परिग्रही नहीं बन सकता है जब तक उसकेआकिंचन भाव जागृत नहीं हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि न ज्यादा तप होना चाहिए न बिल्कुल कम बिल्कुल बराबर होना चाहिए तभी मुक्ति मिलेगी। केवल धुन का पक्का होने से काम नहीं होता श्रद्धान भी पक्का होना चाहिए तभी काम पक्का होगा।

 

 

उन्होंने कहा कि क्षुल्लक को उत्कृष्ट श्रावक माना जाता है परंतु वह मुनि के बीच भी रहकर श्रावक ही माना जाता है। आवरण सहित है तो वह निष्प्रही नहीं हो सकता उसके लिए तो मुनि धर्म अंगीकार करना ही पड़ेगा। आचार्य ने कहा कि समुद्र भी अपने पास कुछ नहीं रखता लहरों और ज्वार भाटा के माध्यम से छोड़ देता है जबकि आप परिग्रह के आवरण को छोड़ नहीं पा रहे हो। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दूध में विजातीय वस्तु मिलाई जाती है तो उसका स्वरूप परिवर्तित हो जाता है।

 

 

मीठे पकवान में थोड़ा सा नमक डालने पर स्वाद अच्छा हो जाता है दूध में डालो तो वह विकृत हो जाता है, उसी प्रकार साधक की साधना मे कोई विकृत भाव आ जाता है तो उसकी साधना

 

विकृति को प्राप्त हो जाती है। संस्कार के कारण ही जीवन में

 

 

परिवर्तन की लहर दौड़ती है। जैसे संस्कार होंगे वैसा ही परिवर्तन होगा।
नलीन जैन लुहाड़िया से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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