यदि आपको कीमत बढ़ानी है तो बोलना कम कर दे आदित्य सागर महाराज
कोटा
रिद्धि सिद्धि नगर में दिगंबर जैन मंदिर में अपने मंगल प्रवचन देते हुए मुनि श्री आदित्य सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य चाह उत्कृष्टता की रखता है, परंतु पुरुषार्थ वैसा नहीं करता है। उत्कृष्टता के लिए मर्यादित जीवन जीना है। मनुष्य को बोलने से अधिक सुनना चाहिए और वह इसके विपरीत जीवन जीता है।
महाराज श्री ने कहा कि उसे सुनाने में अधिक आनंद आता है। जब आप ज्यादा बोलते हैं तो आपकी कीमत भी कम होती है। यदि आपको कीमत बढ़ानी है तो बोलना कम कर दे कम बोलने वाले व्यक्ति को सुना भी अधिक जाता है। आध्यात्मिक प्रबंधन यह कहता है कि कम बोले परंतु काम का बोले, नहीं बन पा रहा है तो फिर ना बोले।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक प्रबंधन कहता है कि मौन में शब्द हो शब्दों में भी मौन हो। मनुष्य 2.5 वर्ष की आयु में बोलना सीख जाता है परंतु कहां पर क्या बोलना है यह मरते दम तक नहीं सीख पाता है। हमें जिस शब्द का जहां श्रेष्ठ प्रयोजन हो, वहां करना चाहिए वरना मौन रहना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
