हम कितने ही गुण लेकर बैठे रहे, लेकिन एक अवगुण सारे गुणों को गंदा कर देता है सुधा सागर महाराज

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हम कितने ही गुण लेकर बैठे रहे, लेकिन एक अवगुण सारे गुणों को गंदा कर देता है सुधा सागर महाराज
सागर
भाग्योदय तीर्थ में विराजमान निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव 108 श्री सुधा सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि हम अच्छाई को समझे या ना समझे लेकिन बुराई का ज्ञान होना चाहिए,

 

उन्होंने कहा कि हम कितने ही गुण लेकर बैठे रहे, लेकिन एक अवगुण भी सारे गुणों को गंदा कर देता है। हजारों खुशियां जिंदगी भर हंसा सकेगी या नहीं लेकिन एक ग़म जिंदगी भर रुला सकता है। व्यक्ति की जिंदगी में एक व्यसन आ जाए, संसार के सारे गुण रख दिए जाएं, वे सब गुण अवगुण में परिवर्तित हो जाएंगे। 

 

 

उन्होंने कहा कि व्यसन अलग चीज है पाप अलग चीज है, पाप इतना खतरनाक नहीं है व्यसन खतरनाक है। इसलिए जैनाचार्यों ने पांच पाप की व्याख्या अलग की और व्यसनों की व्याख्या अलग की। पाप कोई बड़ी चीज नहीं है पाप तो छूट जाते हैं व्यसन नहीं छुटता। पाप लत नहीं बनाता व्यसन लत बनाता है। पाप का ज्ञान होने पर पाप छूट जाता है। व्यसन का ज्ञान होने के बाद भी व्यसन छूटता नहीं है।

महाराज श्री ने आगे कहा कि सारी दुनिया पाप क्यों कर रही है क्योंकि वह उसे पाप मानती ही नहीं है। यानी जो पाप को पाप नहीं मानकर पाप करे तो क्या वह पापी नहीं है क्या?शेर भली भोजन कर रहा है लेकिन पाप हो रहा है तो वह पापी की कोटि में आएगा। जाने अनजाने कैसे भी करो, पाप तो पाप ही रहेगा।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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