*सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी (राज.) में हो रहा है देवों द्वारा जल का अभिषेक :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी*यदि हम सच्ची श्रद्धा रखें तो ऐसे अतिशय हर मंदिर , हर क्षेत्र में रोज घटने लगेगा विज्ञाश्री माताजी
गुंसी
प. पू. भारत गौरव श्रमणी गणिनी आर्यिका रत्न 105 गुरु माँ विज्ञाश्री माताजी ससंघ का विराग विज्ञामय चातुर्मास राजस्थान की पावन पुनीत धरा श्री दिगम्बर जैन अतिक्षय क्षेत्र सहस्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी जिला – टोंक में चल रहा है । माताजी अपनी साधना और तपस्या में निरंतर लीन है ।
गुरु माँ के अवतरण दिवस पर हरियाली अमावस्या से शुरू हुए भगवान श्री शांतिनाथ के देवकृत अभिषेक को आज पांच दिन हो गये हैं । 7 अगस्त को प्रातः 10 बजकर 10 मिनट पर शुरू हुए अभिषेक अगले दिन तक चल रहे थे और उसकी जल की सुंगध पूरे क्षेत्र में फैल रही थी । निवाई , चाकसू , केकड़ी , ककोड़ , कोटा , जयपुर , टोंक , झिलाय , मालपुरा , तालेड़ा आदि – आदि स्थानों से भक्तगण प्रभु दर्शन को उपस्थित हो रहे थे ।



प्रातः सभी भक्तों ने प्रभु के अभिषेक , शांतिधारा करके अपने को आनन्दित किया । प्रभु श्री शांतिनाथ के जय जयकरों से मन्दिर प्रांगण गूंज उठा । जितने भी लोग इस दृश्य के साक्षी बनें सभी की जुबान पर एक ही बात थी इतनी सुगंधित जलधारा है यह तो महान अतिशय हुआ है ।
पूज्य माताजी ने सभी को संबोधित करते हुए कहा – यदि हम सच्ची श्रद्धा रखें तो ऐसे अतिशय हर मंदिर , हर क्षेत्र में रोज घटने लगेगा । जितनी भावों की विशुद्धि से क्रिया होगी वैसी ही वर्गणाएँ जुड़ेगी । लोग कहते हैं नए मंदिर नहीं बनने चाहिए उनकी सेवा कैसे होगी ? लेकिन इस दृश्य को देखकर एक बात जरूर याद रखना जब श्रावक नहीं करेगा तो देवता स्वयं आकर अभिषेक करेंगे । चाहे वो कोई भी क्षेत्र हो या किसी समाज का मंदिर जहां शुद्धि होगी , विशुद्धि होगी और भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी वहाँ हर दिन अतिशय देखने को मिलेगा ।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
