पुरुषार्थ का फल भाग्य है, विज्ञाश्री माताजी
जयपुर
प. पू. भारत गौरव गणिनी भूषण आर्यिका 105 गुरुमाँ विज्ञाश्री माताजी ने प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को पुरुषार्थ का फल भाग्य है इस विषय पर समझाते हुए कहा कि – ऊपर की मंजिल पर पहुँचने के लिए सीढ़ीयाँ पुरुषार्थ का काम करती है और लिफ्ट भाग्य का काम करती है। सीढ़ीयों पर चढ़ने में भले ही मेहनत, परिश्रम करना पड़ता है. पर आप जरूर ही मंजिल तक पहुँच जाओगे।
भाग्य के भरोसे बैठे रहने वाला पुरुषार्थ हीन मनुष्य लिफ्ट का मजा तो लेता है, पर पता नहीं कब बिजली चली जाये और तुम अंदर ही अटक जाओ। ये मत भूलना कि आज का भाग्य तुम्हारा कल का पुरुषार्थ था और आज जो पुरुषार्थ करोगे वह कल तुम्हारा भाग्य बनेगा। भाग्य के भरोसे जीने वाले बंधुओं तुम्हारे जीवन से खुशियां भाग जायेगी और पुरुषार्थ से भाग्य को बनाने वाले बंधुओं खुशियां तेरे चरण चुमेगी।
पूज्य गुरु माँ की आहारचर्या कराने का परम सौभाग्य गुरूभक्त राजेन्द्र भौंच सपरिवार ने प्राप्त किया। मंगल विहार कॉलोनी जयपुर में गुरु मां ससंघ सान्निध्य में धर्म का नाद गूंज रहा है ।
नितिन दीपशिखा पाटनी ने शादी की सालगिरह पर गुरु मां का मंगल आशीष प्राप्त किया।
