जो सूर्य के प्रकाश में भोजन करता है , वह विश्व में प्रकाशित होता है । विमल सागर महाराज

धर्म

जो सूर्य के प्रकाश में भोजन करता है , वह विश्व में प्रकाशित होता है । विमल सागर महाराज
मंदसौर
समाधिस्थ आचार्य श्री  विद्यासागर जी महामुनिराज के शिष्य  प.पू. मुनिश्री  विमलसागर जी , प.पू. मुनिश्री अनंतसागर जी , प.पू. मुनिश्री  धर्मसागर जी एवं प.पू. मुनिश्री भावसागर जी महाराज 24 फरवरी को श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री अभिनंदननाथ दिगंबर जैन मंदिर के दर्शन हेतु पधारे,

 

 

इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधन करते हुए मुनि श्री विमल सागर महाराज जी ने कहा कि दान सुखों की खान है, दान से अनंत गुना फल मिलता है। श्रीफल चढ़ाने से राज्य की प्राप्ति होती है, इसके फल का वर्णन हम कह नहीं सकते हैं, प्रत्येक आत्मा में अनंत शक्ति है। बस जगाने की आवश्यकता है। यह सुख वास्तविक सुख नहीं है । फास्ट फूड में अशुद्ध पदार्थ होते है । जो सूर्य के प्रकाश में भोजन करता है , वह विश्व में प्रकाशित होता है । उन्होंने कहा पहले भारत में बैठ कर ही भोजन करते थे, आज पश्चिमी सभ्यता के कारण खड़े होकर करने लगे है । सम्मान के साथ ही भोजन करना चाहिए ।     

 

 

 

इस बेला में मुनिश्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने महासमाधि मरण किया है , वह हमेशा गरीबों के लिए चिंतित रहते थे, आचार्य श्री ने जो कार्य किए है वह स्वर्ण अक्षरों में लिखने लायक है ।
इस अवसर पर निर्यापक मुनिश्री अभयसागर जी एवं मुनिश्री अक्षयसागर जी , मुनिश्री प्रशस्तसागरजी , मुनिश्री प्रयोगसागर जी, मुनिश्री प्रबोधसागर जी, मुनिश्री प्रणम्यसागरजी, मुनिश्री प्रभातसागर जी, मुनिश्री चंद्रसागर जी महाराज का मुनि दीक्षा दिवस मनाया गया प्रात: काल आचार्य श्री की पूजन हुई, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, शास्त्र अर्पण एवं पाद प्रक्षालन किया गया ।

 

25 फरवरी को दोपहर 1 बजे श्री श्रेयांसनाथ जैन मंदिर गुरुद्वारा रोड सभा गृह में समाधिस्थ प. पू.आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की श्रृद्धांजलि (भावांजलि) सभा होगी जिसमें सकल जैन समाज एवं शासन प्रशासन के प्रमुख महानुभाव भी श्रद्धांजलि अर्पण करेंगे ।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *