परम पूज्या गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी के हीरक जन्म जयंती महोत्सव पर एक विवरण
है युग की प्रथम गणिनी कहते गुरुवर ज्ञानी
सद्मार्ग की पावन ज्योति
त्याग तप की जीवंत प्रतिमूर्ति
मुक्ति पथ की अनुगामी
नमन गुरु माँ विशुद्धमति
आज हम पूज्य गुरु मां गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी का हीरक जन्म जयंती महोत्सव मना रहे हैं। निश्चित रूप से ऐसी भारती की श्रुतज्ञ नंदनी कोई और नहीं है। यदि है तो वह गणिनी माँ श्री विशुद्धमति माताजी हैं। गुरु माँ नारी शक्ति का प्रतिरूप है आपने संयम त्याग के द्वारा अपनी शिक्षा ज्ञान के द्वारा न जाने कितनी बेटियों को धर्म मार्ग पर अग्रसर करते हुए मोक्षमार्ग पर अग्रसर किया है।


आप इस युग की सर्वाधिक दीक्षा प्रदात्री गणिनी आर्यिका है ।आपको भारत गौरव की उपाधि से भी सुशोभित किया जा चुका है। हम सबके लिए एक पुण्य का अवसर है की हम गुरु माँ का हीरक जन्म जयंती महोत्सव मना रहे है। इनकी साधना के विषय मे जितना लिखा जाए कम है यही कामना है आपका संयम पथ और बलवती हो आप दीर्घायु हो चिरायु हो शतायु हो ।
भाव भरे सुमन
आपकी शुभ वंदना से मै हुआ निहाल
गुरु माँ विशुद्धमति तुमने कर दिया कमाल।
आदर्श आपकी चर्या, आदर्श है ख्याल
गुरु माँ विशुद्धमति तुमने कर दिया कमाल
मन मे उठी सब शंकाओं के हल किए सवाल
गुरु माँ विशुद्धमति तुमने कर दिया कमाल
जैन धर्म की ध्वजा, तुम्ही तो प्राण हो
सच पूछो तो महावीर की तुम्ही तो शान हो
माँ भारती की नंदनी जग मे तुम हो विशाल
गुरु माँ विशुद्धमति तुमने कर दिया कमाल
गंगा की ज्ञान धारा को, सब जग मे बहाया
स्वर्गो की छटा जेसा यहाँ द्रश्य दिखाया
चारित्र की ध्वजा हो, तुम ज्ञान की टकसाल
गुरु माँ विशुद्धमति तुमने कर दिया कमाल
मेरी मति विज्ञ करके लो मुझे संभाल
गुरु माँ विशुद्धमति तुमने कर दिया कमाल
अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
