जीवन के निर्माण से जीवन का निर्वाण होगाआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

जीवन के निर्माण से जीवन का निर्वाण होगाआचार्य श्री वर्धमान सागर जी ऋषभदेव केसरिया जी आचार्य शिरोमणि श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित ऋषभदेव केसरिया जी में विराजमान है ।गुरुकुल जिनालय की धर्मसभा में आचार्य श्री ने बताया कि श्री भगवान ऋषभदेव के जन्म के पूर्व भोग भूमि थी कल्पवृक्ष थे उनसे प्राणी जो भी इच्छा कामना करते थे वह वस्तु मिल जाती थी। देवलोक में कंठ में अमृत झरता था इस कारण उन्हें भूख प्यास का अनुभव नहीं होता था। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने गुरुकुल ऋषभदेव की धर्म सभा में प्रगट की ब्रह्मचारी गजू भैय्या,राजेश पंचोलिया ,योगेश गंगावत अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि आदिनाथ भगवान के जन्म के बाद उन्होंने जीवन यापन करने के लिए असि मसि, कृषि शिल्प कला वाणिज्य का उपदेश दिया । ब्राह्मी और सुंदरी के माध्यम से अंक और लिपी कला का ज्ञान दिया आचार्य श्री ने बताया कि 6 कर्मों के सहारे जीवन संसार चलता है संसार असार है इसलिए जीवन निर्माण की वास्तविकता को समझना जरूरी है। जीवन का निर्माण देव शास्त्र और गुरुओं के उपदेश अनुसार संस्कार ,संयमित , अनुशासित जीवन से करना होता है।     तभी जीवन से निर्वाण अर्थात सिद्धालय की प्राप्ति होगी। श्री ऋषभदेव भगवान सहित सभी तीर्थंकरों के हम पर बहुत उपकार हैं ,जिन्होंने तपस्या, साधना से आत्मा पर लगे कर्मों को नष्ट कर केवल ज्ञान प्राप्त किया ,और सभी के कल्याण के लिए धर्म उपदेश देकर धर्म का प्रवर्तन किया। आज भगवान नहीं होते तो हमारा जीवन यापन नहीं होता गुरुदेव आचार्य श्री ने बताया कि धर्म को धारण करने से जीवन में उन्नति होती है ।आज छोटे-छोटे नियम व्रत लेने से व्यक्ति घबराता है भोग में सभी लिप्त है रात्रि भोजन के त्याग में सिर्फ अन्य का त्याग ही नहीं संपूर्ण रात्रि भोजन का त्याग होना चाहिए त्याग से संयम से भावी जीवन का निर्माण होता है। आजकल खानपान में विकृति आने से जीवन गलत हो रहा है। इसलिए भगवान के उपदेश अनुसार अहिंसक सात्विक जीवन को अपनाना चाहिए तभी मनुष्य पर्याय की सार्थकता होगी। 
श्री भट्टारक यश कीर्ति दिगंबर जैन ट्रस्ट एंव दिगम्बर जैन समाज द्वारा आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव गुरुकुल ऋषभदेव में शोभा यात्रा गुरुकुल से प्रारंभ होकर सभी मुख्य पात्रों के निवास पर जावेगी जुलूस प्रारंभ स्थल गुरुकुलसौधर्मइन्द्र मिलाप भाई किरीट भाई कोठारी से प्रारंभ दोपहर कोराजा श्रेयांश डॉ. धर्मेन्द्र भाई किरीट भाई कोठारी से माता पिता सुरेश कुमार बंशीलाल कोठरी से महायज्ञनायक सुन्दरलाल पृथ्वीराज भाणावतसे कुबेर जयप्रकाश लक्ष्मीलाल सिसपुरिया से होते हुए ध्वजारोहण कर्ता राजमल शकरलाल कोठारी के निवास से मुख्य कलश स्थापना नवनीतलाल भवरलाल गड़ियास्वामी वात्सल्य भोजन पुण्यार्जक रामचन्द्र पन्नालाल नागदा बाहुबली जी, विनोद बद्रीलाल शाह माहेंद् अनन्त कुमार बंशीलाल कोठारी सनत कुमार इन्द्र तरूण जितेंद्र रमेश सिसपुरिया से होते हुए अखण्डज्योत सुशीला देवी चांदमल किकावत से पंडाल उदघाटनकर्ता दिलीप शकरलाल दलावत,स्वामी वात्सल्यसुन्दरलाल किकावत से जुलूसराजा सोम जीवन्धर झमकलाल किकावत ईशानइंद्र सुमेश कुमार बदामीलाल वाणावत भरत चकवर्ती बंशीलाल बजेचंद शाह सांयकाल के प्रोग्राम गुरूदेव की आरती गुरुकुल में 6:30 के बाद मेंहदी व इंद्र सभा गुरुकुल ग्राउंड में 7:30 PM को होगीराजेश पंचोलिया से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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