देश में अनेक महापुरुषों ने देश के साथ आत्मा को भी स्वाधीन कराया आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
सलूंबर
राजस्थान के साथ देश के शूरवीरों ने बाहरी लुटेरो आक्रमणकारियो से देश,धर्म,र्और संस्कृति की रक्षा बलिदान के माध्यम से की। राजस्थान में जैन भामाशाह ने देश राज्य धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए अपनी पूरी संपत्ति न्योछावर कर दी हाडा रानी जैसी महिलाएं बहुत कम अपितु नहीं के बराबर है ,जिन्होंने देश प्रदेश की रक्षा के लिए आदर्श उपस्थित किया। स्मारक में हाडा रानी के शौर्य कहानी को चित्रों के माध्यम से अंकित करना चाहिए ताकि देश ही नहीं विदेश के लोग भी इसके त्याग बलिदान , राष्ट्र धर्म से प्रेरणा ले सके।

यह मंगल देशना जैन आचार्य पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने हाडा रानी पुष्पांजलि कार्यक्रम में व्यक्त की। ब्रह्मचारी गजू भैय्या,राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि आज संक्रांति दिवस है जिसका अर्थ जीवन में परिवर्तन होता है अब सूर्य 6 माह के लिए उत्तरायण होगा अब उत्तर में सूर्य उदित होकर उत्तर में अस्त होगा।





सूर्य से प्रकाश और ऊर्जा मिलती हैं।भारत का इतिहास पुरुषो के साथ महिलाओ के अनुकरणीय गौरव शाली योगदान से सज्जित है दक्षिण भारत में भी महिला रानी ने अनेक बार युद्ध कर देश राज्य की रक्षा की।उत्तर भारत में झांसी की रानी के शोर्य बलिदान से सब परिचित हैं सलूंबर की हाडा रानी ने देश हित में राष्ट्र धर्म,शील और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना स्वयं बलिदान कर आदर्श प्रस्तुत किया। स्वाधीनता का आशय हम अपना कार्य धर्म स्वतंत्रता से करे।


इस भारत देश में अनेक महापुरुषों चक्रवती, नारायण,बलभद्र हुए हैं जिन्होंने देश के साथ अपनी आत्मा को भी स्वाधीन कराया है।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी का उपदेश हुआ। श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि रानी का जन्म 1600 वर्ष पूर्व बूंदी के आसपास हुआ था तब अहिंसा और दया का जोर था ,रानी भी अहिंसा और दया से प्रभावित थी। उसमें पति को संदेश दिया कि तलवार नहीं उठाओगे तो देश के संस्कृति मिट जाएगी, धर्म मिट जाएगा ,देश मिट जाएगा ।जब राष्ट्र जीवित रहेगा तो धर्म जीवित रहेगा तब जीवन भी रहेगा उसने अपना नारी धर्म निभाया कि यह समय पीठ दिखाने का नहीं है रानी का तेज देखकर राजा को ग्लानि कर्तव्य हुई उसके भीतर का तेज और शौर्य जग गया और उसने कर्तव्य को संकल्प में परिणित किया ।रानी ने काम रूपी शत्रु से शील की रक्षा कर नारी धर्म निभा कर आज हर दिल में जीवित हैं ।इसलिए आप उसके नारी धर्म को याद कर रहे हो।

देशव्रती हुकमीचंद प्रभुलाल दोषी , ने बताया कि उप खंड स्तरीय पर्यटन विकास समिति सलूंबर एवम् वीरांगना हाडा रानी गौरव संस्थान के तत्वाधान में वीरांगना हाडा रानी स्मारक सलूंबर प्रतिमा स्थापना दिवस मकर संक्रांति पुष्पांजलि कार्यक्रमअंतर्गत 14 जनवरी 2024 रविवार को रावली पोल पर हाडा रानी पुष्पांजलि कार्यक्रम जैन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ के गौरवमय सानिध्य आयोजित किया गया जिसमें वक्ताओं ने बताया कि नवविवाहित क्षत्राणी जिनकी शादी रतन सिंह राजा से हुई एक सप्ताह भी शादी को नहीं हुआ राज्य में विद्रोह की स्थिति में उनके पति युद्ध के लिए गए उनके द्वारा निशानी की मांग सैनिक के माध्यम से की तब सलेह कुंवर रानी ने अपना शीश काटकर निशानी पति को युद्ध में भेज दिया सलेह कुंवर बूंदी के शासक हाडा संग्राम सिंह की पुत्री थी शासन द्वारा हाड़ी रानी के नाम से महिला बटालियन की भी स्थापना सन 2008 में की गई है। इसके पूर्व दिगंबर जैन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी विशाल संघ सहित कार्यक्रम स्थल पहुंचे।इस अवसर पर जैन समाज के साथ नगर के धार्मिक,सामाजिक राजनीतिक और राजकीय प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
