मुनि शुद्ध सागर महाराज का हुआ केंशलोच दिगम्बर साधु वही बन सकता है जो निर्ममत्व भाव को जगाता है। मुनि श्री
निवाई :
शुक्रवार को स्थानीय शांतिनाथ भवन पर जैन मुनि शुद्ध सागर महाराज का केंशलोच हुआ। जिसमें श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना एवं केंशलोच देख कर कर्म निर्जरा की एवम मुनि श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया।
जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला एवं राकेश संधी ने बताया कि बिचला जैन मंदिर के शांतिनाथ भवन पर शुक्रवार को चतुर्दशी के तहत मुनि श्री ने केंशलोच किए। पूजा अर्चना की। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने नित्य नियम पूजा ,शांतिनाथ चालीसा, सुपार्श्वनाथ चालीसा एवं महावीर चालीसा के साथ सम्मेदशिखर वन्दना पाठ , बारह भावना, के पाठ किए।

इस अवसर पर मुनि शुद्ध सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि दिगम्बर साधु वही बन सकता है जो निर्ममत्व भाव को जगाता है। जो अंतरंग और बहिरंग दोनों प्रकार के परिग्रह से रहित होता है वह ही नग्नत्व को धारण करने में समर्थ होता है। उन्होंने कहा कि





ज्ञान ध्यान की साधना में रत रहते हुए अपने अठ्ठाईस मुलगुणो का पालन करते है जिसमें से केंशलोच भी एक है। उन्होंने केंशलोच का तात्पर्य बताते हुए कहा कि अपने हाथों से अपने सिर दाढ़ी व मूंछ के बालो को उखाड़ कर फेंक देना यह भी वैराग्य व शरीर के प्रति निर्ममता का अनूठा उदाहरण है।
इस अवसर पर महावीर प्रसाद पराणा धर्मचंद चंवरिया महेंद्र संधी पुनित संधी विष्णु बोहरा मनन दत्तवास शंभु कठमाणा त्रिलोक पांडया नवरत्न टोंग्या हेमचंद संधी शिखरचंद काला संजय बड़ागांव त्रिलोक सिरस नन्दलाल चौधरी त्रिलोक रजवास नितिन गिन्दोडी प्रेमचंद सोगानी अजीत काला दिनेश सोगानी पदमचंद पीपलू मोहनलाल चंवरिया अनिल पराणा नीरज जैन सहित कई लोग मौजूद थे।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
