रथ पे सवार श्रीजी चले श्रीजी के द्वारा रथ यात्रा महोत्सव

धर्म

रथ पे सवार श्रीजी चले श्रीजी के द्वारा रथ यात्रा महोत्सव

घाटोल

वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में पर्यूषण महापर्व के समापन के अवसर पर निकलने वाली शोभा यात्रा में जब श्रीजी रथ यात्रा पर सवार होकर जब आदिनाथ मंदिर जाने को नगर से निकले तो संपूर्ण नगर का जन दर्शन करने के लिए भक्ति भाव एवं गगन भेदी नारों के साथ संपूर्ण समाज के साथ ही अन्य समाज के लोगो भीड़ उमड़ पड़ी, प्रातकाल मंदिर में नित्य नियम अभिषेक, शांति धारा के उपरांत दोपहर में रथ यात्रा का आयोजन वासुपुज्य मंदिर प्रांगण से प्रारंभ हुआ।

 

 

जो शनै शनै विष्णु मंदिर, पुराना बस स्टैंड से होते हुए आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में पहुंचे जहां जुलूस में सबसे आगे नन्हे मुन्ने बालक जैन धर्म के ध्वज पताका के साथ जैन धर्म की जय जयकार के गगन भेदी नारा लगाते हुए चल रहे थे वहीं इसके पीछे बैंड बाजे एवं ढोल नगाड़ों के साथ सफेद वस्त्र एवं साफा पहना युवाओं की मस्त टोली भक्ति के गीतों पर झूम रहे थे वही पीछे महिला मंडल एवं बालिका मंडल अपने-अपने ग्रुपों के भिन्न-भिन्न रंग की साड़ियां जिसमें केसरिया, पिली, नीली, एवं अन्य कलर के रंग-बिरंगे साड़ियां व बालिका ड्रेस पहनकर जुलूस में इंद्रधनुष कि तरह मनमोहन एवं आकर्षक से जुलूस की भव्यता बड़ा रहे थी एवं उनके पीछे वृद्धजन भक्तों की टोली ढोल एवं वाद्य यंत्र पर पुराने भक्ति गीतो के भजनों के साथ भक्ति में चल रहे थे जहां सोने चांदी के गंध कोठी एवं काष्ट निर्मित प्राचीन रथ में विराजित भगवान आदिनाथ, भगवान शांतिनाथ, भगवान महावीर भगवान वासुपूज्य एवं पार्श्वनाथ भगवान किं भजनों से पूजा अर्चना करते हुए चल रहे थे वही रथ यात्रा में आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री विमल, अनंत, धर्म एवं भाव सागर महाराज के साथ रथ यात्रा चल रह थे जहां पर नगर वासी ने मुनि संघ का जगह-जगह पाद प्रक्षालन किया एवं श्रीफल अर्पण किया गया वही रथ यात्रा घाटोल के पुराने बस स्टैंड पर पहुंची जहां पर श्रीजी का विशेष पूजा अर्चना कि गई।

मुनिश्री विमल सागर महाराज के साथ ही सघं ने धर्म सभा को संबोधित किया जहां समस्त नगर वासियों ने मुनि संघ के समक्ष महापर्व के दौरान जाने अनजाने में जो भूल चूक हुई है उसके लिए संपूर्ण समाज से मुनि संघ से क्षमा याचना मांगी गई इस अवसर पर मुनिश्री विमल सागर महाराज ने कहा कि कहा कि अंत में समाचार एक बार फिर आते है ऐसे ही क्षमा आती है ,पर्युषण के बाद क्षमावाणी के रूप में ,धर्म प्रभावना के लिए रथोत्सव किया जाता है ,क्षमा वीरो का भूषण है ,सट्टा से जीवन में बट्टा लगता है ,करदो सबको माफ़ और दिल को साफ़ करलो सबके दिल में अपना घर कर लो ,गाय के दूध से सौ वर्ष की बूढ़ी माँ भी चलने लगती है ,बच्चो को दान के संस्कार ज़रूर दे ,चतुर्थ काल के एक हज़ार वर्ष के अनुसार सोलह हज़ार वर्ष के उपवास हो गए है।

मुनिश्री भावसागर महाराज ने कहा कि रथ यात्रा धर्म तीर्थ के नायक प्रभु की धर्म देशना का प्रतीक है ,इससे असंख्य जीवों को आत्मबोध की प्राप्ति होती है ,वासुपूज्य भगवान का मंदिर 725 वर्ष पुराना है ,रथ 250 वर्ष प्राचीन है ,चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा के समय सैकडो रथों में प्रतिमा रख कर छह खंडों की परिक्रमा करने का कथन ग्रंथों में मिलता है ,लोगो को नशे से दूर रहना चाहिए ,इससे शरीर का नाश होता है ,अपने जीवन में शाकाहार अपनाना चाहिए ,लोगो ने सोलह उपवास किए है ग्रीष्म जैसी तपन में ये दुनिया का सब से बड़ा आश्चर्य हैं जो सोलह दिन बिना भोजन के रहे। तत्पश्चात रथ यात्रा आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे जहां पर कास्ट निर्मित रथ को रात्रि विश्राम आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में ही होगा प्रातकाल पूर्ण वासु पुज्य मंदिर के लिए रवाना होगी।

 

284 घंटे बिना भोजन करने वाले 6 लोगो का उपवास का पारणा महोत्सव सम्पन्न होगा*
रविवार को 16 उपवास करने वाले 6 लोगो का उपवास का पारणा महोत्सव सम्पन्न होगा जिसमे कई स्थानों से लोग शामिल होंगे कुछ लोगो का शनिवार को 16वां उपवास था यानि 360 घंटे तक बिना भोजन के रह कर तप साधना कर रहे है, जिसमें 16 उपवास धारक अजीत लालावत बदामी लाल धीरावत, राजेंद्र पारसोलिया, अनूप जोधावत,प्रभादेवी एवं निकिता परसोलिया का 16 उपवास संपन्न होंगे।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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