भूतकाल सपना है, भविष्य काल कल्पना है भावसागर महाराज
घाटोल
बासपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनिश्री 108 भावसागर महाराज ने कहा की समय का घोड़ा तेजी से भागता है, समय का पीछा आज तक कोई नहीं कर सका है। कंप्यूटर मोबाइल के युग में तीव्र गति से समय का परिवर्तन हो रहा है।
धर्म करने के विषय में कहा कि धर्म यह सोचकर करना चाहिए कि काल मेरे पीछे खड़ा है, और धन यह सोचकर कमाना चाहिए कि मुझे भी 100 साल जीना है। भूतकाल सपना है, भविष्य काल कल्पना है। और वर्तमान सिर्फ अपना है। भूतकाल के सपनों में खोया रहने वाला व्यक्ति कभी कुछ नहीं कर सकता है। भविष्य काल की कल्पना करते हुए यदि वर्तमान में पुरुषार्थ नहीं करोगे तो कुछ भी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते। बीते समय को भूलकर वर्तमान समय में पुरुषार्थ करने वाला का भविष्य उज्जवल होता है। समय का पाबंद व्यक्ति विश्वसनीय होता है। आलसी व्यक्ति वर्तमान में करने योग्य काम को भविष्य के लिए छोड़ देता है। व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान उसकी वाणी और क्रियाकलापों से होती है। मोह के समान कोई शत्रु नहीं है क्रोध के समान कोई अग्नि नहीं है, और क्षमा के समान कोई सुख नहीं है।
17 सितंबर को मूलभूत संस्कार महोत्सव में वांगड़ के 81 कस्बों के यू आर शामिल होंगे
पूज्य मुनि संघ के सानिध्य में 17 सितंबर को प्रातः बेला में 8 वर्ष से अधिक अविवाहित युवाओं का मूल गुण संस्कार महोत्सव आयोजित होगा जिसमें वांगड प्रांत के 81 युवा शामिल होंगे। इसी महोत्सव के अंतर्गत दोपहर की बेला में युवा ऊर्जा प्रदान महोत्सव का आयोजन भी होगा। इस आयोजन में युवाओं को धर्म की रक्षा के लिए तत्पर रहने और धार्मिक क्रियाओं के मैनेजमेंट के बारे में बताया जाएगा। इसी के साथ रात्रि विवाह, प्री वेडिंग, कोरियोग्राफर पर प्रतिबंध लगाने वाले नगरों को सम्मानित भी किया जाएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
