भारत को भारत बोलना प्रारंभ कर दिया तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। सुव्रतसागर महाराज
बीना
पूज्य मुनि श्री 108 सुव्रतत सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व अहिंसा के सिद्धांतों का पालन करता है।
इस पर विशेष प्रकाश डालते हुए अपने उद्बोधन ने महाराज श्री ने कहा कि हमारे देश और प्रदेशों का बंटवारा नदी और पर्वतों के माध्यम से होता है लेकिन यह परंपरा भारत में ही नहीं पूरे विश्व में है। लेकिन एक विशेष बात जरूर है यह परंपरा आदिकाल से जिन शासन में बताई गई है। उन्होंने अहिंसा के विषय में बताया कि हमारे देश में कभी भी संकल्प भी हिंसा नहीं की जाती। और किसी को भी जानबूझकर नहीं मारा जाता यह सिद्धांत जैन धर्म से मिलता है। क्योंकि जैन धर्म में सबसे पहले त्याग संकल्प हिंसा का त्याग बताया गया है।
अहिंसा के विषय में बहुत ही सटीक बोलते हुए महाराज श्री ने कहा कि भारत ही नहीं अभी तो सारा विश्व जैन धर्म के द्वारा बताए गए हिंसा के सिद्धांतों का पालन करता है सारे विश्व को अहिंसा का सिद्धांत देने वाला जैन धर्म ही है।

और कहा कि भारत को भारत कहना भी अहिंसा का प्रतीक है। जब हम भारत देश में जीवन पाए हैं तो यह बहुत ही बड़ी गर्व की बात है। और सौभाग्य के कारण ही भारतवर्ष में जन्म मिलता है।

महाराज श्री ने कहा कि विद्युत उत्सर्जन की खोज करने वाले आइंस्टीन जैसे विद्वान भी भारत में रहने के लिए तरसते थे भारत में बहुत ही पुण्य आत्मा जन्म लेते हैं। और हम सब पुण्य आत्माएं हैं कि हमें भारत में जन्म मिला है अब देखना यह है कि हम अपने जीवन का कितना उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमने अपने जीवन में अपने देश और धर्म की रक्षा कर ली तो समझो बहुत बड़ा काम कर लिया। और भारत को भारत बोलना प्रारंभ कर दिया तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
