अहंकारी व्यक्ति कभी अपने को दोषी नहीं मानता सुब्रत सागर महाराज
बीना
नगर के शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में वर्षा योग कर रहे आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनि श्री सुब्रत सागर महाराज ने जीवन के निर्माण के लिए अहंकार कोत्याग करने की बात कही।
पूज्य महाराज श्री ने प्रकाश डालते हुए कहा कि अहंकारी व्यक्ति कभी भी अपने को दोषी नहीं मानता है। अपने जीवन के निर्माण करने के लिए अहंकार का त्याग करना आवश्यक है। जीवन में नम्रता जहां आ जाती है नहीं समर्पण का भाव होता है। मन के समर्पण को सच्ची श्रद्धा बताते हुए महाराज श्री ने कहा कि यदि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा रखी जाती है और अपने मन से मान नहीं निकाला गया तो तो आप श्रद्धा के पात्र नहीं हैं। तभी जीने का महत्व जीने का महत्व सार्थक होगा।

यदि आत्मा का होकर जीवन जीना है तो कीड़ा और कमल का उदाहरण देते हुए महाराज श्री ने कहा कि हमें यह सोच समझकर निर्णय लेना होगा कि हमें कीड़े की भांति जीना है या कमल की भाती। हमारी जिंदगी हाथी के सुन के समान है। उस जो स्वयं अपनी सूंड से नहा कर अपनी सूंड से स्वयं धूल डाल लेता है। जीवन में अगर श्रद्धा आ जाएगी तो ज्ञान स्वयं आ जाएगा। जैसी चाह है वैसी ही राह हो जाती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
