डॉ एपीजे अब्दुल कलाम शुद्ध शाकाहारी थे, वह एक महान व्यक्तित्व थे उनकी अष्टम पुण्यतिथि पर विशेष
एक ऐसा व्यक्तित्व जिस पर सभी को गर्व होना चाहिए वह व्यक्तित्व है मिसाइल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जो देश के राष्ट्रपति भी हुए।
आज उनकी अष्टम पुण्यतिथि है और ऐसे क्षणों में ऐसे व्यक्तित्व को याद करना ही चाहिए उन्होंने एक मिसाल सभी के बीच दी है और उनका जीवन हम सभी के लिए एक प्रेरणा देता है श्री कलाम जो ना सिर्फ सादगी पसंद व्यक्तित्व थे, बल्कि सकारात्मक निर्णय लेने के साथ शुद्ध शाकाहारी थे। वे जीव जंतु से विशेष प्रेम करते थे।
जिसका उदाहरण इस बात से मिलता है कि राष्ट्रपति भवन के गार्डन में वह एक बार घूम रहे थे तब उन्होंने एक मोर को देखा तो पता चला कि उसे ट्यूमर है लेकिन उन्होंने उसका इलाज कराने के लिए डॉक्टर को बुलाया वह जंतु जिससे उन्हें कोई मतलब नहीं था उससे उनका कोई देश सिद्ध नहीं होता था लेकिन वह जीव जंतुओं से विशेष प्रेम करते थे निश्चित रूप से ऐसा व्यक्तित्व महान ही कहलाता है। पक्षी जगत पर्यावरण का सूचक होता है यह समझ लेना चाहिए यदि पक्षी जगत संकट में है तो हमारे बुरे दिन निकट है राष्ट्रवाद मैं विश्वास करने वाले व्यक्तित्व डॉक्टर अब्दुल कलाम विनम्रता के धनी थे इनके बारे में जितना लिखा जाए वह कम ही होगा।
डॉक्टर कलाम के शुद्ध शाकाहारी होने का प्रमाण

सहयोग की बात थी की 6 दिसंबर 2002 को बकरीद के दिन ही डॉक्टर गंगवाल की किताब शाकाहारी क्यों इसका विमोचन विज्ञान भवन में उस समय के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था।

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उस समय की कहानी बहुत रोचक रही यह किताब शाकाहार की किताब थी किताब का विमोचन न हो ऐसी कोशिश समुदाय विशेष के लोगो ने दिल्ली में की थी। उस दिन शुक्रवार था बाबरी मस्जिद विध्वंस के वर्षगांठ थी। और श्री कलाम उसी समय वही थे। और वह मुस्लिम जाति के थे इसी लिए कुछ लोगों ने आपत्ति की थी।

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जब कलाम साहब ने उस किताब का विमोचन किया और उस दिन अपने भाषण में कहा कि यह किताब का विमोचन करने का अधिकार इसलिए मुझे है कि मैं कट्टर शाकाहारी हूं। मुझे लगता है बकरीद के दिन जो हिंसा है, उसे रोकने का तरीका है की ज्यादा से ज्यादा मांसाहारी लोगों को शाकाहारी बनाना है। और मुस्लिम समुदाय के अंदर शाकाहार का प्रचार प्रसार करना है। वह हो रहा है। सऊदी में दुबई में ऐसा हो रहा कही ऐसी मुस्लिम कम्युनिटी है जो बकरीद के दिन बकरी नहीं काटती नही काटती। और पुना में अजुमने इस्लामिक सोसायटी है वह बकरी नही काटती।
ऐसे व्यक्तित्व को कोटि-कोटि नमन
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
