जब कोई अच्छी या सामाजिक रुप से श्रेष्ठ घटना घटती है तो उसको फॉलो क्यों नहीं किया जाता है? महिलाओं के प्रति नकारात्मकता नही रखनी चाहिए ज्योति मौर्य एक अपवाद, संजय जैन बड़जात्या
वर्तमान में सोशल मीडिया पर ज्योति मौर्य और अतुल कुमार मौर्य की घटना का बड़ा ट्रेंड चल रहा है हर कोई इसी विषय पर रील बना बना कर भेज रहा है। जिसमें महिलाओं को पूर्णरूपेण बेवफा बताया गया है और उनकी उच्च शिक्षा व्यवस्था पर भी उंगली उठाई जा रही है। मैं यहां पर यह पूछना चाहता हूं कि जिस हाईवे पर दुर्घटनाएं घट जाती हैं तो क्या वह हाईवे बंद हो जाता है। क्या उन पर पुनः यातायात का आवागमन नहीं होता है।अनेकों ऐसी घटनाएं घटती हैं तो क्या उनके घटने से आगे जीवन रुक जाता है।
जब कोई अच्छी या सामाजिक रुप से श्रेष्ठ घटना घटती है तो उसको फॉलो क्यों नहीं किया जाता है? उसकी भी तो रील बना कर सोशल मीडिया पर डालनी चाहिए । लेकिन वह नहीं करते हैं । कहीं से छोटी सी बुराई आती है तो फिर उसे टारगेट करके सब केवल उसी में लग जाते हैं।
हिंदी विषय का यदि अध्ययन किया होगा तो वहां भी अपवाद आते हैं इसी प्रकार ज्योति मौर्य का किस्सा भी एक अपवाद है वह समाज को कोई दिशा नहीं देता है ना ही पुरुष वर्ग को महिलाओं के प्रति अपनी धारणा में परिवर्तन करना चाहिए। जहां बुराई है, तो वहां अच्छाई अवश्य है। इस बात को भी दृष्टिगत रखते हुए निर्णय लेना चाहिए मेरा यह मानना है कि केवल एक ज्योति मौर्य के कारण सभी महिलाओं पर उंगली नहीं उठाई जानी चाहिए।
सोच बदलो वक्त बदलो, नकारात्मकता को छोड़कर सकारात्मक विचार के साथ आगे बढ़ना चाहिए वैसे यह देखा गया है कि नकारात्मकता बहुत तेजी के साथ हावी होती है और सकारात्मकता को ग्रहण करने में बहुत समय लग जाता है। आपकी एक मजाक भरी रील या सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट कई ऐसे व्यक्तियों को दिशा दे सकता है और कई महिलाओं की उन्नति रुक सकती है। अतः अपनी सोच में परिवर्तन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए यह मेरा निजी सुझाव और विचार है यदि किसी को इस विचार से कोई तकलीफ होती है तो उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं।
संजय जैन बड़जात्या कामा
