दमोह जैन समाज ने दिया ज्ञापन
दमोह
जैन शाश्वत तीर्थ क्षेत्र शिखरजी की शुचिता एवं पवित्रता को नष्ट किए जाने के विरोध में एवं किसी भी कीमत पर पर्यटन स्थल ना बनने देने की मांग को लेकर दिगंबर जैन समाज दमोह ने प्रधानमंत्री गृहमंत्री एवं झारखंड के मुख्यमंत्री के नाम दमोह कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा इसमें दिगंबर जैन पंचायत कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी जैन मिलन दमोह आदि संस्थाओं के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि सम्मिलित रहे
कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री सुनील वेजिटेरियन ने बताया कि झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित जैन धर्म का पावन पुनीत शिखरजी तीर्थ क्षेत्र जैन धर्मावलंबियां के लिए चिरकाल से सर्वोच्च आस्था एवं श्रद्धा का केंद्र रहा है यह पावन स्थली जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों मैं से 20 तीर्थंकरों की मोक्ष स्थली रही है इसका पहाड़ शाश्वत एवं इतना पवित्र माना जाता है कि जैन भक्त यहां नंगे पैर ही पूरे 27 किलोमीटर के पहाड़ की भूखे पेट ही वंदना करते हैं किंतु कुछ वर्षों से यहां सैर सपाटा एवं पिकनिक मनाने के उद्देश्य कतिपय असामाजिक तत्वों के द्वारा बहुत बड़ी संख्या में तीर्थ क्षेत्र पर पहुंचकर मदिरापान मांसाहार एवं फूहड़ डांस आदि के द्वारा इस क्षेत्र की शुचिता एवं पवित्रता को खंडित किया जा रहा है जो ना सिर्फ निंदनीय है वरन जैन भक्तों के लिए अत्यंत पीड़ा दायक है कोई छोटी सी चिंगारी इस पूरे क्षेत्र के साथ-साथ देश में एक बड़े विवाद एवं विरोध का कारण बन सकती है ज्ञापन में प्रधानमंत्री जी से मांग की गई है कि एक शाश्वत तीर्थ क्षेत्र की एक निश्चित परिधि पारसनाथ पहाड़ी मोड़ से मधुबन सहित संपूर्ण पारसनाथ पहाड़ी को पवित्र धर्मस्थली क्षेत्र घोषित करते हुए क्षेत्र में मांसाहार व शराब के विक्रय के साथ-साथ सेवन के भी कड़े प्रतिबंध व दंड को लेकर राजज्ञा जारी की जानी चाहिए हमारे देश भारत के संविधान की धारा 29 के अंतर्गत अल्पसंख्यक जैन समाज के सर्वोच्च तीर्थ स्थल की पवित्रता व सुचिता को बनाए रखने हेतु केंद्र सरकार एवं साथ में राज्य सरकार अपना संरक्षण प्रदान करते हुए उचित कदम उठाने की कृपा करें।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
