वैज्ञानिक घास पर शोध कर रहे हैं हम मनुष्य पर — मुनि पुंगव सुधासागर महाराज
झांसी
आज इस विश्वविद्यालय में घास जैसी वस्तु पर शोध हो रहा है उसके शोध पर हजारों वैज्ञानिक लगे हैं कौन से घास में किस चीज की मात्र कितनी पाई जाती है हम साधु घास की जगह आपके जीवन को कैसे उपयोगी बनाऊ इसी में लगे हैं। हम शोध कर रहे हैं कि मनुष्य इस प्रकृति को क्या दे सकते हैं। इस पर अनुसंधान लगातार चल रहा है कहीं पड़ोसी तो दुःखी नहीं कही आपसे राष्ट्र तो दुःखी तो नहीं है ।आप राष्ट्र को क्या दे सकते हैं महावीर स्वामी का भी तो सबसे बड़ा संदेश यही था जियो और जीने दो तुम से कितने लोग अहोभाग्य मानते हैं कितने लोग तुम से सुखी हो इस कलयुग में सबसे अधिक मनुष्य से नदियां, हवाये, परिवार पत्नी वेटा तक दुःखी है यहां तक कि तुम्हारे गुरु तक दुःखी है साधु आप से कुछ नहीं चाहता साधु तो आपके दुःख को देखकर आपकी आदतों को देख कर दुखी हो जाता है हम आपको सुखी देखना चाहते हैं मुझे तो आज चालीस पैंतालीस सालो में आज तक किसी ने दुख नहीं दिया दे भी नहीं सकता लेकिन यदि साधु उपदेश दे रहा है तो कहीं ना कहीं साधु के मन में आ रहा है कि आपके जीवन मैं सुख कैसे वनाऊ हम इतना चलकर आये है तो आराम करना चाहिए था थके हुए थे लेकिन नहीं साधु आपको देखकर आप पर करूणा करके उपदेश देने लगा।
करगुआ तीर्थ से विहार कर मुनिश्री सुधासागर महाराज संघ सहित झांसी युनिवर्सिटी पहुचे। जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप आदित्य प्रवीण जैन विश्व परिवार निलय जैन कमल जैन राजमणि जैन सहित सैंकड़ों भक्तों ने गुरुवार की अगवानी की इस दौरान मुनि ने सभी को आशीर्वाद दिया
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इस अवसर पर विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव सुधासागर महाराज ने कहा कि इस विश्वविद्यालय में घास पर शोध हो रहा है, जल पर शोध हो रहा है, उसे कैसे अधिक उपयोगी बनाऊ लेकिन हम नदियों को प्रदूषित कर रहे हैं।प्रदूषण मुक्त करने के लिए कुछ नहीं कर रहे। हवाओं पर शोध हो रहा है लेकिन हवाऐं इतनी प्रदूषित हो गई है। कि सांस लेना हम लोग भी चलती फिरती युनिवर्सिटी है। हम मनुष्य को कैसे अच्छा बना सकते हैं कैसे मनुष्यो के खोट निकाल सकते है।

किसमें कौन सी क्षमता है जगत कल्याण के लिए मनुष्य क्या कर सकता है,इसी में लगे हैं मानव और मानवता में जो अंतर आ गया है उसे दूर करना होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
