बीसवीं सदी के प्रथम आचार्य चारित्र चक्रवर्ती गुरु नाम गुरु प्रातः स्मरणीय आचार्य श्री शान्तिसागर जी महामुनि के अवतरण दिवस मिति अनुसार आषाढ़ कृष्णा 6 बुधवार दिनांक अनुसार 8 जून 151 वे जन्म वर्ष 2023 पर कोटिशः नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु

धर्म

श्री शांति वीर शिव धर्म अजीत वर्धमान सुर्रिभ्यो नमः ।
बीसवीं सदी के प्रथम आचार्य चारित्र चक्रवर्ती गुरु नाम गुरु प्रातः स्मरणीय आचार्य श्री शान्तिसागर जी महामुनि के अवतरण दिवस मिति अनुसार आषाढ़ कृष्णा 6 बुधवार दिनांक अनुसार 8 जून 151 वे जन्म वर्ष 2023 पर कोटिशः नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु

 

भोज ग्राम के श्रीमती सत्यवती जी श्री भीमगोड़ा जी पाटिल के यहां सन 18 72 में 1008 श्री वासु पूज्य भगवान के गर्भ कल्याणक दिवस आषाढ़ कृष्णा 6 विक्रम संवत 1929 एक महा मना का जन्म हुआ जिनका नाम सात गोंडा जी रखा गया आपसे बड़े 2 भाई तथा एक भाई छोटा तथा एक बहन भी थी
आपमें बचपन से ही धार्मिक संस्कार रहे 18 वर्ष की उम्र में अपने बिस्तर का त्याग कर दिया।
आजीवन ब्रहचर्य व्रत
आपने 18 वर्ष की अल्पायु में श्री सिद्ध सागर जी से आजीवन ब्रहचर्य व्रत लिया25 वर्ष की उम्र में जूते चप्पल का त्याग कर दिया32 वर्ष की उम्र में अपने सम्मेद शिखर जी की यात्रा की घी और तेल का आजीवन त्याग कर दिया शिखर जी की यात्रा के बाद 32 वर्ष की उम्र में ही एक समय भोजन का नियम ले लिया जीवन आपने एक समय ही भोजन किया।एक आत्मा जो पुण्यात्मा बन कर धर्मात्मा बन कर परमात्मा बनने की राह पर है उनका गुणानुवादसन् 1915 में आपने उत्तर ग्राम में क्षुल्लक दीक्षा श्री देवेंद्र कीर्ति जी स्वामी से ली

 

ऐलक दीक्षा
आपने गिरनार यात्रा सन 1918 में 1008 श्री नेमिनाथ भगवान की 5 वी टोंक पर स्वयम ने ऐलक दीक्षा ली
सन 1920 यरनाल कर्नाटक में आपने मुनि दीक्षा ग्रहण की
आपको सन 1924 में आचार्य पद दिया गया।
सन 1925 में श्री श्रवण बेलगोला महामस्तकाभिषेक के बाद गुरुणा गुरु की उपाधि दी गई
आपने दीक्षा गुरु श्री देवेंद्र कीर्ति जी को पुनः मुनि दीक्षा दी इसलिए भी गुरुणा गुरु कहा जाता है
सन् 1937 में आपको चारित्र चक्रवर्ती पद दिया गया

 

जिनवाणी संरक्षण
आपकी प्रेरणा से धवल जय धवल टीका वाले षटखंडागम महाबंध कषाय पाहुड ग्रन्थ त्रय को 50 मन तांबे पर 2664 पत्रों पर अंकित कराया यह ग्रंथ आज भी फलटण में सुशोभित विराजित है
उपसर्ग
आपके जीवन मे सर्प के कोंगनोली गोकाक कौंनुर शेडवाल आदि 5 से अधिकअनेक उपसर्ग सिंह के गोकाक मुक्तागिर जंगल श्रवण बेलगोला यात्रा सोनागिर बावनगजा द्रोण गिरीसिद्ध क्षेत्रो 6 से अधिक उपसर्ग से अधिक मकोड़े के चींटी के मानव जन्य उपसर्ग हुए है आपने नाम अनुरूप शांति के सागर बन कर उपसर्ग सहन किये।
आपने अपने जीवन के साधु जीवन के 40 वर्षों में 9938 उपवास किए
आपने 26 मुनि दीक्षा दी

प्रथम मुनि शिष्य श्री वीरसागरजी
4 आर्यिका दीक्षा 16 ऐलक दीक्षा 28 क्षुल्लकदीक्षा 14 क्षुल्लिका दीक्षा कुल 88 आपने दीक्षाएं दी
आपके बड़े भाई ने भी आपसे मुनि दीक्षा लेकर मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी बने।
1105 दिन तक अनाज का त्याग विधर्मियो के मंदिर प्रवेश के विरोध में किया
8 वर्षो तक श्रावको ने केवल दूध चावल पानी दिया8 दिन तक आहार में पानी ही नही लिया।ललितपुर चातुर्मास सन 1929 में सभी रसों का आजीवन त्याग किया
24 अक्टूम्बर 1951 में गजपंथा जी मे 12 वर्ष की नियम सल्लेखना ली
26 अगस्त 1955 को लिखित पत्र से मुनि श्री वीर सागर जी को आचार्य पद दिया
36 दिन की सल्लेखना में 18 सितम्बर 1955 को आपकी उत्कृष्ट समाधि हुई।

मुनि दीक्षा शताब्दी महोत्सव
वर्ष 2020 में मुनि दीक्षा के 100 वर्ष पूर्ण होने पर पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मार्गदर्शन एवम् यरनाल चातुर्मास सानिध्य में देश में शताब्दी महोत्सव मनाया गया।
2024 में आचार्य पदारोहण के 100 वर्ष पूर्ण होगे।यह कार्यक्रम भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाने हेतुराष्ट्रीय समिति का गठन उदयपुर मेंआचार्य श्री के सानिध्य में किया गया है
वर्तमान में आपकी मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा में पंचम पट्टाधीश पद को वर्ष 1990 सेआचार्य शिरोमणि वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी सुशोभित कर वर्ष 2023 का चातुर्मास उदयपुर में करेंगे। अभी गुरुदेव उदयपुर राजस्थान में विराजित हैजुलाई 2023 को चातुर्मास कलश स्थापना उदयपुर में ससंघ करेंगे।

सभी आचार्यो को कोटिशः नमोस्तु
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार 9926054065

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