ऋषभदेव निर्वाण दिवस पर राष्ट्रीय वेबीनार

धर्म
  1. ऋषभदेव निर्वाण दिवस पर राष्ट्रीय वेबीनार
    31जनवरी शुभचिंतक फाउन्डेशन एवं श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रष्ट के संयुक्त तत्वावधान में (भगवान ऋषभदेव की तीर्थंकर परंपरा इतिहास एवं पुरातत्व के आलोक में )विषय पर आवासीय पटल पर वेबीनार का आयोजन किया गया अध्यक्ष विदुषी डा0 नीलम जैन मुख्य अतिथि प्रो0 फूलचंद प्रेमी
    वक्ता डा0 भानूप्रताप सिंह(जैन धर्म का केंद्र फतेहपुर सीकरी)
    वक्ता डा करुणा शंकर शुक्ला(भगवान ऋषभदेव भारतीय कला एवं पुरातत्व के परिप्रेक्ष्य में) थे।संचालन डा ममता जैन ने किया।संयोजक शैलेंद्र जैन ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य भगवान ऋषभदेव की तीर्थंकर परंपरा के ऐतिहासिक, राष्ट्रीय एवं सामाजिक अवदान से जन जन को परिचित कराना।प्रख्यात पत्रकार डा0 भानुप्रताप सिंह ने कहा कि फतेहपुर सीकरी का इतिहास काफी प्राचीन है यहां से मिली बहुत सी प्रतिमाओं के साथ 1010 की सरस्वती की अति सुंदर है तथा यह एक प्रमुख जैन केंद्र था। पुरातत्विद डा0 करुणा शंकर शुक्ला ने कहा कि सिंधू धाटी कि सभ्यता मे प्रचलित लिपि ब्राम्ही है और कुछ प्रतिमाओं को ऋषभदेव की प्रतिमा होने की संभावना से भी इनकार नही किया जा सकता।
    मुख्य अतिथि के रूप प्रो फूलचंद्र प्रेमी ने कहा कि भगवान ऋषभदेव की ऐतिहासिकता स्वयं सिद्ध जिषके अनगिनत प्रमाण वेदो पुराणो जैन एवं बौद्ध ग्रंथों के साथ साथ सिंधू घाटी से मिली पुरावशेष भी इषका समर्थन करते है। कार्यक्रम की अध्यक्षा डा नीलम जैन ने कहा कि हमे भगवान ऋषभदेव ने सर्वप्रथम कर्म और धर्म का पाठ मानव जाति को पढाया और कृषि करो या ऋषि बनो का मंत्र समाज को दिया।हमे इस तरह के आयोजनों को करते रहे जिषसे उनकी शिक्षायें जन जन तक पहुंच सकें।कार्यक्रम का सफल संचालन डा ममता जैन पुणे ने किया। शैलेंद्र जैन ने सभी सहभागियों का आभार व्यक्त किया।

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