भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर जयपुर मानसरोवर जयपुर में बढ़ा रही है धर्म की भव्य प्रभावना पुरूषार्थ पुरुषों को शोभा देता है जानवरो को नही आर्यिका विज्ञाश्री
जयपुर
भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी जयपुर के श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर जयपुर में धर्म की भव्य प्रभावना बढ़ा रही है , जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि आज जिनालय में प्रातः श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा ,एवं अष्टद्रव्यों से पूजा के बाद गुरु मां ने अपने मंगलमय प्रवचन में बताया कि आज कल हर आदमी पर दृष्टि डाली जाये तो यही नजर आयेगा कि हम और कुछ करना चाहते हैं ? हमारी करनी में परमात्मा की पूजा और हमारी दृष्टि में पदार्थ छाया हुआ है पदार्थ ही हमें पराधीनता की ओर ले जाकर परतंत्रता में जीने को मजबूर कर देता है, हमारा ज्ञान अविकसित होता है,तब हमारा ध्येय भी सीमित होता है, और सीमित ध्येय दु:खों का ही जन्मदाता है। हमारे अंदर दोनों शक्तियां विद्यमान है एक सीमितता का ध्येय बनाने की और एक असीमितता का ध्येय बनाने की यदि हम असीमितता का ध्येय बनाकर कोई धार्मिक पुरुषार्थ करते है तो हमारा चारित्र हमें असीमितता को प्राप्त होने वाली मंजिल को प्राप्त कराता है लेकिन सीमितता में हम मंजिल के पथ को ही नहीं प्राप्त हो पाती है | मंजिल पर पहुँचना सरल है लेकिन पथ पर सही तरीके से चलना बहुत कठिन है हमारी दृष्टि हमेशा लक्ष्य पर टिकी रहे तो ध्येय पाना बहुत ही आसान है। पुरुषार्थ हमारा नव जीवन हे पदार्थ पथ सहायक बन सकता लेकिन पथ प्रदर्शक नहीं । पुरुषार्थ पुरुष को ही शोभा देता है, जानवरों को नहीं।
कार्यक्रम समापन बाद गुरु मां ने सभी भक्तजनों को मंगलमय आशीर्वाद दिया।
राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान
