विमर्शसागर महाराज व विशुद्ध मति माताजी संघ का हुआ भव्य महा मिलन
भिड़
🧿11/12/2022-
माँ विशुद्ध विज्ञ सम्मेद शिखर पद यात्रा* के अंतर्गत दिनांक 11/12/2022 को परम् पूज्या सिद्धांत रत्न, भारत गौरव *गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमती माताजी ससंघ* का कीर्ति नगर स्तम्भ से गाजे बाजे एवं भक्तों की एक लंबी कतार के साथ जयकारों मध्य हुआ भिंड नगर में प्रवेश एवं साथ ही हुआ आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज से मिलन हुआ।* आचार्य श्री की संघस्थ बहनों एवं आर्यिका वृन्द द्वारा कीर्ति स्तम्भ चौराहे पर पूज्या माताजी का पाद प्रक्षालन कर अगवानी की गयीं।इसी अवसर पर गुरु माँ ससंघ ने सर्वप्रथम, आचार्य श्री की त्रय भक्ति युत एक सुंदर वंदना की, पश्चात संघस्थ बहनों द्वारा आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं पूज्या गुरु माँ द्वारा शास्त्र भेंट किये गए। संघस्थ परम् पूज्या सिद्धान्त वाग्मी, पट्ट गणिनी आर्यिका 105 श्री विज्ञमती माताजी ने गुरुदेव के चरणों में निवेदित कर कहा कि निश्चित ही किसी भी कार्य की शुरुआत में यदि अर्हन्त देव, तीर्थंकर, अथवा तीर्थंकर सम निर्ग्रन्थ दिगम्बर यतिराजों के दर्शन प्राप्त हो जाये तो वो कार्य निश्चित रूप से सफलता के आयाम को स्पर्श करता हैं। सम्मेद शिखर पद यात्रा में तीर्थंकर के लघुनंदन सम आपके दर्शन कर हमें यह विश्वास हैं कि यह यात्रा निर्बाध रूप से सम्पन्न होगी।_ पुनः पुनः नमोस्तु निवेदित कर पूज्या माताजी ने अपने शब्दों को विराम दिया।
आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान की सर्वश्रेष्ठ ज्येष्ठ विशुध्दमती माताजी जिनका तप त्याग संयम अपने आप मे विशिष्ट हैं श्रेष्ठ हैं* और वर्तमान में जिन्होंने अपने संयम काल को निरतिचार चर्या का पालन करके विशुद्ध बनाया हैं। नाम जैसा माते का हैं, वैसा ही ये इनका सम्पूर्ण जीवन रहा हैं।_बहुत समय से संघ में ये चर्चा चलती रहती थी कि कब और कैसे माताजी से मिलन होगा। जैसे ही माताजी का विहार इस ओर हुआ, संघ में यह चर्चा हुआ करती थी कि निश्चित ही अपना मिलन माताजी से होगा। क्योंकि माताजी वर्तमान में आर्यिकाओं में सर्व श्रेष्ठ स्थान रखती हैं। ये दर्शन प्रौढ़, ज्ञान प्रौढ़, चरित्र प्रौढ़ हैं, न जाने कितने गुण उनमें विद्यमान हैं, ये गुणों की भंडार हैं।
संघ में जो विज्ञमती माताजी हैं जो मेरी बहन स्वरूप हैं और माताजी की बेटी रूप हैं, मैं, दोनों माताजी के लिए हमेशा संघ में यही कहा करता था कि आप लोग उनके चरणों मे जा कर के उनसे कुछ संस्कार लीजिए, उनसे अगर अपना जीवन गढ़ना हो तो उनके जीवन की तरह गढ़ने का पुरुषार्थ करें। यद्यपि, मैं मुनि पद पर हूँ, आचार्य पद पर हूँ, लेकिन माताजी को देख कर यही लगता है कि सच में माँ मेरे पास बैठी हुई हैं। ये क्षण बहुत ही आनंद प्रदायक हैं।_* ग्वालियर वासी जो यहाँ उपस्थित है, ग्वालियर वासियों को भी निश्चित ही कितना बड़ा सौभाग्य मिला हैं जो माते को उनकी जन्म भूमि पर चातुर्मास कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।दीर्घ काल से जो भावना पूरे संघ ने भायी वो आज माताजी से मिलकर पूर्णता को प्राप्त हुई है।* माताजी से में यही कहूंगा कि आप अभी यहीं रुके, तो हमें भी कुछ माँ का सानिध्य मिलेगा तो प्रसन्नता ही नहीं अतीव प्रसन्नता होगी। यह साक्षात जगत माता हैं। कहते हैं, जिनवाणी माँ को तो तीर्थंकर मुख से ख़िरते हुए नहीं देखा हैं लेकिन वर्तमान में जिनवाणी की कोई मूर्ति देखना है तो साक्षात गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमती माताजी को देखें। अपने जीवन काल मे जिन्होंने ऐसे ऐसे ग्रंथो का वर्णन् किया हैं जिसकी कोई सानी नहीं हैं, मैंने भी उन ग्रंथो का अध्ययन किया हैं।* इतनी वय में भी माताजी का इतना दृढ़ संकल्प हैं कि मैं शिखरजी की वंदना करुंगी, निश्चित ही ये उनकी दृढ़ संकल्प शक्ति का एक उदाहरण हैं। जब माताजी का आगमन हुआ तो मेरा रोम रोम पुलकित हो रहा था। माताजी के उत्साह को देख कर मैं बहुत ही आनंदित हूँ और पूरे संघ के लिए यही भावना और कामना करता हूँ की माताजी के जितने भी संकल्प हो,वो सभी निर्विघ्न सानंद सम्पन्न हो।निश्चित ही मन तो नहीं कर रहा हैं, की माताजी यहाँ से जाएं, क्योंकि माताजी अगर यहाँ रुकेंगी तो इस रजत संयम महोत्सव पर अंतरंग से प्रसन्नता होगी, क्योंकि माताजी ने अपने जीवन काल में जो निर्मल विशुद्ध चर्या का पालन किया हैं वह अद्भुत हैं। जो पूर्व में आर्यिकायें हुई हैं, जिन्हें हम आर्यिका चन्दना माँ और आर्यिका सीता माँ के नाम से पुकारते हैं, ऐसी कोई आर्यिका अगर वर्तमान में देखनी हैं, तो वो हैं गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमती माताजी।
जो ऐसी ज्येष्ठ एवं श्रेष्ठ माताजी की सेवा का सानिध्य प्राप्त कर रहें हैं वो स्वयं में सौभाग्य शाली हैं क्योंकि अगर हमने गुरु आज्ञा का पालन किया हैं तो मूलाचार का पालन किया हैं। निश्चित ही माताजी की साधना विशुद्ध से भी अधिक विशुद्ध हो, मैं ऐसी प्रार्थना और कामना करता हूं क्योंकि ये माताजी अपने आप में बहुत बड़ा उदाहरण हैं वर्तमान और भविष्य के लिए की जो चर्या आगम में कही गयी हैं वैसी ही चर्या का पालन माताजी कर रही हैं।

_साथ ही हमारी बहन विज्ञमती माताजी, जिनका जीवन माताजी की सेवा में पूर्णतया समर्पित रहा हैं, और अनवरत हैं उनके लिए भी मेरा बहुत बहुत आशीर्वाद हैं।_*सम्पूर्ण संघ के लिए भी मेरा बहुत बहुत शुभाशीष। आचार्य श्री द्वारा माताजी ससंघ को शास्त्र एवं वस्त्र भेंट कर कुशल क्षेम का आदान प्रदान हुआ।
भक्तों द्वारा पुनः पुनः निवेदन करने पर की जगत माता, पूज्या गणिनी आर्यिका श्री विशुद्धमती माताजी के दिव्य मुखारबिंद से हमें दो शब्द तो सुनने ही हैं, तब पूज्या गुरु माँ ने नमोस्तु निवेदित करते हुए कहा कि आचार्य भगवान, आप आशीर्वाद ही दे रहें हैं तो ऐसा आशीष दीजिये की मेरे नाम के आगे तो “वि” उपसर्ग लगा हैं, वो हट जाएं और मैं शीघ्र ही अंतिम लक्ष्य शुद्ध अवस्था को प्राप्त कर पाँऊ।
– *विशुद्ध आर्यिका संघ* से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
