कोई भी कार्य को करने से पूर्व दिल से जुड़ना चाहिए आगम सागर जी महाराज
बीना
बड़ी बजरिया स्थित पार्श्वनाथ जिनालय में मुनि श्री आगम सागर जी महाराज संघ सानिध्य में आचार्य विद्यासागर महाराज के 51 वे आचार्य पदारोहण पर पोस्टल स्टांप का अनावरण व पाषाण से बनने जा रहे नवीन जिनालय की आधारशिला रखी गई। इस अवसर पर पोस्टल स्टांप का अनावरण सागर के डाक विभाग अधीक्षक आरआर जाटव सुदेश जैन विधायक महेश राय एवं पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
वही लाल पाषाण से बनने जा रहे त्रिकाल चौबीसी के शिलान्यास का सौभाग्य जितेंद्र जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इससे पूर्व आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का संगीतमय पूजन किया गया।
बीना के अशोक साकार ने बताया कि पूज्य मुनि श्री आगम सागर महाराज का अवतरण दिवस भी धूमधाम से मनाया गया।
पूज्य मुनि श्री आगम सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि कोई भी कार्य को करने से पहले दिल से जोड़ना चाहिए दिल की भावना है जो उत्पन्न होती हैं और उन्हीं भावनाओं से बड़ा कार्य सिद्ध होता है। आगे बोलते हुए कहा कि पहचान की प्रतिमा के दर्शन करने मात्र से ही सद्भावना उत्पन्न होने लगती हैं।

उदाहरण के माध्यम से मुनि श्री ने समझाया जैसे चलचित्र देखने में असली पात्रों का परिचय हमें हो जाता है वैसे ही क्षेत्रों पर प्रतिमाओं के दर्शन करने मात्र से परमात्मा का परिचय व दर्शन की अनुभूति होती है। साधु संतों की संगति से अपने जीवन को सार्थक बनाएं। उन्होंने कहा कि संगत से ही रंगत बदल जाती है। जिस मिट्टी को रौंदकर कुम्हार घड़ा बना देता है। वही धूल आंखों में पहुंचने से किरकिरी और गमलों में जाकर फूल खिला देती है। उन्होंने अंत में कहा कि शिष्य को गुरु कुम्हार और धर्म रूपी गमले में अपने आपको और अपना जीवन समर्पित कर देना चाहिए।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
