साधना तो परिवार के बीच भी अच्छे विचारों से की जा सकती है विज्ञमति माताजी
ग्वालियर |
सुख और दुख सभी हमारे कर्मों का ध्यान करना कोई ऐसी साधना नहीं है जिसे करना बहुत मुश्किल हो और इसके लिए भगवान या मंदिर की भी जरूरत नहीं है। ये साधना घर-परिवार के बीच भी अच्छे विचारों से की जा सकती है। इसके लिए मन की सुंदरता का विकास करने की जरूरत है। तुम ध्यान से घबराओ मत क्योंकि ध्यान कोई जटिल कामनहीं है। यह विचार आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ने बुधवार को चम्पाबाग धर्मशाला में व्यक्त किए।माताजी ने बताया कि आचरणका फल भी मिलता है, लेकिन पहले विचारों का फल मिलता है।
यह बहुत अद्भुत होता है, लेकिन विचार श्रेष्ठ होना चाहिए। इसके लिए साधनाकरना पड़ती है। धर्म का उपयोगमन, वचन और शरीर की सुंदरताके लिए किया जाना चाहिए। जिससे सुख मिलता है उससे दुःख दुख भी मिलता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
