पंचम काल में चतुर्थ युग की चर्या के धारी विनीत सागर जी महाराज दीक्षा दिवस पर विशेष
विश्व वन्दनीय आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य चतुर्थ काल की चर्या के धारी मुनि श्री 108 विनीत सागर जी महाराज का संयम,उनकी तप साधना जैसी कोई बिरला साधक कर सकता है। उनका आशीष उनका सानिघ्य रामगंजमडी नगर को भरपूर मिला व राजस्थान हाडौती को मिला उनका प्रभावशाली का यह प्रभाव आज की युवा शक्ति जो धर्म से विमुख हो रही थी। उन्हें मुनि श्री ने जोड़ते हुए सेतु का कार्य किया है। उनके जीवन को धन्य किया। ।
निर्मोही साधक एक संस्मरण
यह दो संस्मरण है हर किसी को यह कहने को वशीभूत कर देता है यह एक संस्मरण 6 dec 2017 का जावद नगर का जहां मुनि श्री चद्रप्रभ सागर जी महाराज के साथ एक कक्ष में साधना रत थे।

भीषण वर्षा और शीतलहर है हम वहां पहुचे देखा तो वो निश्चल निर्मोही होकर दिगम्बरत्व रूप में बस साधना रत थे

ऐसी शीतलहर जहा कोई घर से बाहर तक नही लेकिन मुनि श्री साधना को कर रहे थे। वह हमें देख मुस्कुराए और मंगल आशीष दी। वह जन्मदिन मेरा सार्थक हो गया ऐसी साधना की प्रतिमूर्ति के चरणों मे बना।

एक संस्मरण जब वर्ष 2018में शीतकाल के समय बही पारसनाथ में विराजमान थे उन्हें हर्पिस जैसे रोग ने उन्हें जकड़ लिया

लेकिन उसका पता 2 दिन तक किसी को लगने दिया अपने परिषह को सहते रहे यही होता है एक निर्मोही साधक, परिषह विजयी साधक पावन दीक्षा दिवस पर कोटि कोटि नमन
संयम पथ के अनुगामी
शत शत बार नमामी
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
