स्म्रति के झरोखे से 6 आर्यिका माताजी 10 वा संयम दीक्षा महोत्सव के अंश 19-10-2018 भव्य और एतिहासिक रहा था
कोटा
गणिनी आर्यिका105 विशुद्धमती माताजी ससंघ के सानिध्य में संयम दीक्षा जयंती महोत्सव एवं भावभीनी विनयांजलि समारोह शुक्रवार को तलवंडी स्थित जाट समाज सामुदायिक भवन में हुआ था। कोटा में 10 वर्ष बाद 6 माताजी का दीक्षा जयंती महोत्सव मनाया गया था। इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से आर्यिका विज्ञमति माताजीको निस्प्रसाधिका की उपाधि दी गई था। जिसे समाज के द्वारा बोला गया था।साथ ही कोटा सांसद ओम बिरला ने अंत मे निष्प्रह साधिका उपाधि का उच्चारण किया। जिसे बैठे भक्तजनों द्वारा तालियों की गूंज से 1 मिनट तक अनुमोदन किया गया था

कार्यक्रम की शुरूआत मंगलाचरण से की गई। जिसमें बालिकाओं ने भक्ति व सांस्कृतिक गीतों पर अपने नृत्य की प्रस्तुति से माताजी का मंगलाचरण स्तुति की। जो अदितीय रही इसके बाद चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
भाव भीना क्रर गयी गुरु माँ की चरण वंदना और पद प्रक्षालन
10 वें दीक्षा जयंती पर प्रज्ञा पद्मिनी आर्यिका श्री विज्ञ मति माताजी, विशौर्यमति,माताजी विजीत मतिमाताजी , विदितमति माताजी, विकर्ष मति माताजी ने गुरू आर्यिका विशुद्धमति माता का भक्तिमय गीतों के साथ पाद प्रक्षालन की परंपरा निभाते हुए गुरू माता के चरणों गुरू वंदना करते हुए माताजी की आशीष ली जो गुरु के प्रति शिष्यों का आदर का अदितीय उदाहरण प्रस्तुत कर गयी।

सभी भक्तगण इस अनुशासित विनय भाव को देख गदगद हो गये ऐसे पल सदा सदा अमिट रहेगे इसके बाद शास्त्र भेंट किए गए।
बिरला ने लिया गुरु माँ का आशीर्वाद कहा स्वार्णिम दीक्षा दिवस के लिए समाज के साथ
कार्यक्रम में सांसद ओम बिरला ने भाग लेते गुरू माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। और विनयांजलि देते हुये कहा आज से 10 वर्ष पूर्व कोटा ने एक इतिहास रचा था आगमी 50 वा दीक्षा दिवस जो गुरु माँ का है वह भी ऐतिहासिक होगा जिसकी अगुवाई समाज के साथ मै मै स्वयं करूँगा कहा मै इसे अपनी जवाबदेही मानता हु कहा ये दीक्षाएं उजाले की ओर ले जा रही हैं : सांसद ओम बिरला ने कहा कि 10 वर्ष पूर्व आर्यिका विशुद्धमति माताजी द्वारा इतिहास रचा गया था और विजयादशमी के दिन बाल ब्रह्मचारियों ने सांसारिक मोहमाया के फंदों के दशानन का दहन कर संयम पथ का वरण कर आर्यिका व्रत को धारण किया। ये दीक्षाएं लोगों को अंधरे से उजाले की ओर ले जाने का कार्य कर रही है। मार्च में होने वाले 50वें दीक्षांत समारोह को स्वर्णिम बनाया जाएगा।
आभा से विज्ञमति नाटिका का मंचन अलोकिक प्रस्तुति

10 वर्ष पूर्व कोटा की दीक्षा दिवस का चित्रण प्रस्तुत किया
विज्ञमति माता जी के बचपन से लेकर आभा से विज्ञ मति तक के कुछ अनछुए पहलुओं को स्कूली बच्चों ने नाट्य मंचन किया। तलवंडी जैन मंदिर के निर्देशन में संचालित स्कूल की बालिकाओं को सम्मानित किया गया। शनिवार सुबह 4.30 बजे गणधर वलय स्त्रोत का पाठ माता ससंघ के मुख से विशुद्धमति सभागार में आयोजित किया गया।
गुरु माँ के उपकारो को कभी नहीं चुकाया नहीं जा सकता विज्ञमति माताजी
निष्प्रह साधिका विज्ञमति माताजी ने कहा समय की पुरजोर आंधी सब कुछ करवा सकती है लेकिन जो द्रढ़ रहता है कंपित नहीं होता अकम्पित होता है वह सफल होता है आर्यिका माताजी ने भाव भीने उदगार प्रगट करते हुये कहा गुरु माँ के उपकारो को कभी चुकाया नहीं जा सकता उन्होने कहा गुरु माता पिता के उपकारो से कभी विमुख नहीं हुआ जाता माताजी ने कुछ पंक्तिया गुरु माँ के प्रति विनयांजलि दी वह सभी के ह्रदय को छु गयी
पंक्तिया

इस चेतना की तीर्थ को गुरु माँ संभालिये आई हु तेरी शरण मे इसे मंदिर मे ढालिये
गुरु ही शिष्य के लिये मज़बूत ढाल है गुरु के बिना उस शिष्य पर उठते सवाल है
कर्म चक्र चक्षु से हमको निकालिये आई हु शरण मे इसे मंदिर मे ढालिये
मेरा स्वभाव जल की भाति शुद्ध हो निर्मल सत्य शील क्षमा करुणा मन मे हो प्रबल
गुरु माँ मुझे अपने शासन मे पालिये आई हु शरण मे इसे मंदिर मे ढालिये
गुरु शिष्य का सबंध ही शुभ का प्रबंध है गुरु का आचरण ही शिष्य के लिये सुग्रंथ है
किंचित क्रपा की डोर मेरी और डालिये आई हु शरण मे इसे मंदिर मे ढालिये
गुरु द्वार है दीवार नहीं शिष्य के लिये जिनकी नसीहते हमे शिवमार्ग के लिये
बचपन से लेके आजतक के क्षण सजा दिये आई हु शरण मे इसे मंदिर मे ढालिये
इस चेतना के तीर्थ को मंदिर मे ढालिये आई हु शरण मे इसे मंदिर मे ढालिये
जिसके जीवन मे गुरु नहीं होता उसका जीवन शुरू नहीं होता विशुद्धमति माताजी
समारोह के अंत मे गुरु माँ विशुद्ध मति माताजी ने आर्यिका माताजी गण को वह भक्तो को आशीष दे विशुद्ध माता ने कहा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं होता, उसका जीवन साकार नहीं हो सकता।
इसलिए प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में गुरु का होना जरूरी है और गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही इंसान को मोक्ष की प्राप्ति सम्भव है। शिष्यों में संयम का होना जरूरी है।
एक रिपोर्ट अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
