वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर महाराज की दीक्षा स्थली श्री महावीर जी मे दी दो दीक्षाएं
श्री महावीर जी
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर महाराज वर्ष 2022 का वर्षायोगश्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र में कर रहे है।इस बेला में दिनांक 29 अगस्त 2022 को दीक्षार्थी श्री नरेन्द्र अखावत 68 वर्षीय का नूतन नाम मुनिश्री 108 प्रबुद्ध सागर महाराज एवम दीक्षार्थी श्रीमती शांता देवी 60 वर्षीय का नूतन नाम आर्यिका105 प्रणत माताजी नामकरण किया गया।
इसके पूर्व दीक्षार्थियों की शोभा यात्रा श्री वर्द्धमान सागर सभागार में पहुँची। यहाँ पर आचार्य श्री वर्द्धमान सागर चातुर्मास कमेटी तथा श्री महावीर जी महामस्तकाभिषेक समिति के संयुक्त तत्वाधान में दीक्षा समारोह कार्यक्रम सभागार में आयोजित किया गया।
श्री राजकुमार जी सेठी जयपुर अध्यक्ष आचार्य श्री वर्द्धमान सागर वर्षायोग समिति ने बताया कि प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवती आचार्य 108 श्री शांतिसाग़र महाराज की भक्तिमय पूजन की गई।इस भक्तिमय पूजन को अजय पंचोलिया सनावद ने सुंदर भजनों के द्वारा सम्पन्न कराया।
इस क्रम में सौभाग्यशाली परिवार की 5 महिलाओं द्वारा चोक पूरण की क्रिया की गई। वही दीक्षार्थी श्री नरेंद्र अखावत, एवम दीक्षार्थी श्रीमती शांतादेवी अखावत द्वाराआचार्य श्री से दीक्षा की याचना की। तथा आचार्य श्री एवम समस्त साधुओ, दीदी,भैया श्रावक, श्राविकाओं तथा समाज से क्षमा याचना की।
राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री को शास्त्र भेंट के पुण्यार्जक श्री शान्तिलाल अखावत रहे। आचार्य श्री का प्रवचन हुआ।
इस बेला में दीक्षा की क्रिया संपन्न करते हुए आचार्य श्री के द्वारा दीक्षार्थी के पंच मुष्ठी केशलोच किये गए। तथा दीक्षा संस्कार मस्तक तथा हाथों पर किये गए। इसके बाद आचार्य श्री ने नामकरण किया।श्रीमती शांता देवी
का दीक्षा पश्चात नूतन नाम आर्यिका 105 श्री प्रणतमति माताजी किया गया। पुण्यार्जक परिवार सज्जन जैन, नितिन जैन भुरावत उदयपुर द्वारा नूतन मुनि श्रीको पिच्छीभेंट की।श्री सुशील, पारस,जैन जयपुर द्वारा कमंडल भेंट किये गए। श्री अनिल जैन कांतिलाल मेहता उदयपुर द्वारा शास्त्र भेंट किये गए।
पुण्यार्जक परिवार श्री मुदित नरेंद्र अखावत परिवार द्वारा पिच्छी,एवम श्री श्याम कस्तूरचंद जैन उदयपुर ने शास्त्र,तरुण नरेंद्र जैन ने कमंडल एवम वस्त्र भेंट श्री राजकुमार कस्तूरचंद उदयपुर ने भेंट किये गए।
कार्यक्रम का संचालन आर्यिका श्री महायशमती जी ने किया।
केशलोचन के पल को देख सभी द्रवित
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प्रातः 5 बजे दीक्षार्थी श्री शांतादेवी के केशलोचन हुए जब केशलोच हो रहे थे, तब सभी वैराग्यमयी पलों में सभी द्रवित हो रहे थे। परिजनों के दोनों नेत्रों में एक नेत्र में खुशी के आंसू दूसरे नेत्र में दुख के आंसू झलक आ रहे थे।
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वही दीदीयो के भजनों से वातावरण और वैराग्यमयी हो रहा था।
संघस्थ माताजी के अलावा आर्यिका आर्यिका105 श्री सरस्वतीमति माताजी, आर्यिका 105 श्री सृष्टिभूषण माताजी ने भी दीक्षार्थियों के केशलोचन किये।
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परिजनों एवम अन्य भक्त जिन्हें केशलोच झेलने का अवसर मिला। वह अपने को पुण्यशाली मान रहे है। दोनो दीक्षार्थियों के मंगल स्नान के बाद दोनों ने भगवान का पंचामृत अभिषेक किया।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी



