परिवार और समाज का लीडर बनने की जगह अपनी आत्मा का लीडर बने गुणरंजना श्री जी
रामगंजमंडी
:- पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन

शहर के जैन श्वेताम्बर मंदिर में पर्युषण पर्व के दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।समस्त श्रावक श्राविका बन्धु धर्म आराधना में लीन रहकर कर्म निर्जरा कर रहे है। साध्वी गुणरंजना श्री जी ने कल्पसूत्र का वाचन किया। उन्होंने कहा दूध को उफान आने में तो समय लगता है, लेकिन आदमी को क्रोध आने में समय नही लगता। सत्य हमेशा कड़वा होता है,और असत्य मीठा होता है। लेकिन मीठा हमेशा नुकसानदायक होता है।उन्होंने कल्पसूत्र के विषय मे कहा की कल्पसूत्र सत्य का उदघोष है। बैचैन मन से की गई समस्त धार्मिक क्रियाएं निर्रथक है। अपने मन के मालिक बनो, दास नही।जो इशारे से समझे वह इंसान कहलाता है। साध्वी जी ने श्रावकों को साधु साध्वियों के विहार में चलने की सीख दी।औऱ विहार में चलने के लिए एक ग्रुप बनाने को कहा।उन्होने “परिवार समाज ओर देश के लीडर बनने की जगह अपनी आत्मा के लीडर बनने को कहा उसी
से कल्याण होगा धर्म के क्षेत्र में अगर कोई बोली ली है या दान किया है तो उसका भुगतान तुरन्त करने को कहा। और अगर देर हो जाए तो ब्याज सहित जमा कराए। भगवान महावीर ने बिना कोई शस्त्र उठा अहिंसा का सन्देश दिया। भगवान महावीर ने खुद को देखा ओर अपना कल्याण किया।आज का आदमी सिर्फ दिखावा है,- स्वयं को देखना नही चाहता।
उन्होनें यह सीख दी की जन्मदिन पर केक और पार्टियों की जगह जितने वर्ष के हो गये है उतने दीपक परमात्मा के सामने जलाए। और उतने नवकार मंत्र का जाप करे। यह सीख साध्वी जी ने दी।श्रद्धा :- नीचे से ऊपर जानी चाहिये करुणा :- ऊपर से नीचे की तरफ आनी चाहिये। और प्रेम- सच्चा होना चाहिये- गुणरंजना श्री जी ने कहा साधु और साध्वी आपका नमक खाते है।और सही मार्ग बताकर नमक का कर्ज चुकाने का कार्य करते है। उन्होंने कहा वो माँ बाप धन्य होते है जो अपने बेटे बेटियों को जिन शासन को समर्पित कर देते है।
इन क्षणों में दोपहर में दादागुरुदेव की पूजा हुई और शाम को भजन संध्या एवम भक्ति हुई। चातुर्मास कमेटी के संरक्षक राजकुमार पारख ने
बताया कि प्रवचन के दौरान प्रश्न उत्तर किये जाते है।और संघ पूजा होती है। एवम भजन संध्या में भाग लेने वालों को पारितोषिक देकर सम्मान किया जाता है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
