जो समिति से रहित है उन्हें संसार में पुनःजन्म लेना पढता है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज
श्री महावीरजी
जो समिति से रहित हैं उन्हे ही संसार में पुन: पुन:जन्म लेना पड़ता है। और जो समितियों का पालन कर रहे हैं समझीए, उन्हें जल्द ही मुक्ति रूपी लक्ष्मी प्राप्त होने वाली है। व्यवहार समिति के बिना निश्चय समिति नहीं हो सकती। और निश्चय समिति के बिना मोक्ष नहीं हो सकता । अत:व्यवहार चारित्र को धारण करके निश्चय चारित्र को प्राप्त करने का उद्यम करना चाहिए।
यह उदगार वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ने श्री महावीर जी मे नियम सार के स्वाध्याय में समितियों के विवेचन में प्रकट किये
राजस्थान के प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में विराजित प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्ति सागर जी महाराज की परम्परा के पंचम पट्टाचार्य परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज का प्रात:कालीन वन्दना उपरांत संघ के चेत्यालय में पंचामृत अभिषेक हुआ, तत्पश्चात श्री मद कुंदकुंद आचार्य देव प्रणीत नियम सार ग्रंथराज का सामुहिक स्वाध्याय वाचन हुआ । वही तत्व चर्चा के बाद संघ कांच मंदिरसे आहार चर्या के लिए निकला। दोपहर में भी सामूहिक स्वाध्याय सभा हुई । आपको बता दे
शाम को संग्रहालय के ऊपर परिसर में आरती ,गुरु वंदना नियमित होती है।
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
संकलनकर्ता
अभिषेक जैन लुहाड़िया
रामगंजमंडी

