आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज चर्या

धर्म

श्री शान्तिवीरशिवधर्माजीत वर्द्धमान सुर्रिभ्यो नमः

श्री महावीर जी राजस्थान

राजस्थान के प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में विराजित प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्ति सागर जी महाराज की परम्परा के पंचम पट्टाचार्य परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज का प्रात:कालीन वन्दना उपरांत संघ के चेत्यालय में पंचामृत अभिषेक हुआ, तत्पश्चात श्री मद कुंदकुंद आचार्य देव प्रणीत नियम सार ग्रंथराज का सामुहिक स्वाध्याय वाचन हुआ ।
आचार्य श्री ने स्वाध्याय में बताया कि आध्यात्म की दृष्टि से जो आत्म ध्यान में लीन नहीं है ऐसे श्रमण भी सम्यक दृष्टि नहीं है । विभाव तत्व को हेय और आत्मा के स्व तत्वों को उपादेय बताते हुए आत्म कल्याण की बात कही ।संघस्थ बाल ब्रह्मा गजु भैया एवम बाल ब्रह्मचारिणी पूनम दीदी ने बताया कि प्रतिदिन स्वाध्याय
तत्व चर्चा के बाद संघ की आहार चर्या कांच मंदिर से होती है ।


दोपहर में भी प्रतिदिन सामूहिक स्वाध्याय सभा होगी ।


आचार्य संघ अभी संग्रहालय के ऊपर परिसर में विराजमान हैं। शाम को यही आरती ,गुरु वंदना नियमित होती है।
उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के तप प्रभाव से वर्षा हो रही है राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि
आचार्य श्री आगमन से महती धर्म प्रभावना हो रही है
संकलनकर्ता
अभिषेक लुहाड़िया रामगंजमंडी

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