हे निराकार जब तुम्हें दिया आकार तो स्वयं साकार हो गया | -108 निर्यापक श्रमण श्री समतासागर महाराज जी

हे निराकार जब तुम्हें दिया आकार तो स्वयं साकार हो गया | -108 निर्यापक श्रमण श्री समतासागर महाराज जी     डोंगरगढ़ “ हीरा तो केवल हीरा है,फर्क केवल इतना है, एक हीरा खान के अंदर है और एक हीरा शान पर चड़ा हुआ है |” उसी प्रकार हम सभी की आत्मा है, जो हीरा होते […]

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