हमारी सोच व्यक्ती निष्ट न होकर वस्तुनिष्ट हो गई है” इसीलिये पारिवारिक संबंधों में खटास है -मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज 

“हमारी सोच व्यक्ती निष्ट न होकर वस्तुनिष्ट हो गई है” इसीलिये पारिवारिक संबंधों में खटास है -मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज (जबलपुर) “तकनीकी” के इस युग में हमारा संपर्क पूरे संसार से तो बहुत बड़ा है,लेकिन पारिवारिक संबंध बहुत संकुचित होते जा रहे है”उपरोक्त उदगार भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने “रिश्तों के डोर में […]

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