स्वयं को समझना ही उत्तम आकिंचन धर्म है।अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज

स्वयं को समझना ही उत्तम आकिंचन धर्म है।अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज कुलचाराम हैदराबाद अंतरमना आचार्य श्री 108 प्रसंग सागर महाराज नेउत्तम आकिंचन धर्म बोलते हुए इसका अर्थ समझाया और कहा कि- जो दिख रहा है वह सब छूटने वाला है। राजा हो या रंक, सन्त हो या फकीर, सबको मौत आयेगी। खाली हाथ आया […]

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