सोलहकारण भावना के चिंतवन से ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है दृढ़मति माताजी

सोलहकारण भावना के चिंतवन से ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है दृढ़मति माताजी गौरझामर आर्यिका 105 दृढ़मति माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि 16 कारण भावना के चिंतवन से ही तीर्थंकर प्रकृति का बंध होता है। इसका भावार्थ समझते हुए कहा कि जितने भी तीर्थंकर हुए हैं उन्होंने इसमें 16 कल्याणकारी भावनाओं का […]

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